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अमेरिका में नहीं थम रहा भारतीयों की मौत का सिलसिला, एक और छात्र की मिली लाश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 6, 2024, 06:10 AM IST

Indian Student Killed in US News: अमेरिका में हाल के महीनों में किसी भी भारतीय की यह सातवीं मौत का मामला है। भारतीय दूतावास की ओर से बताया गया है कि ओहायो के क्लीवलैंड में भारतीय छात्र उमा सत्य साई की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से काफी दुखी हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और वह भारत में परिवार के साथ संपर्क में है।

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अमेरिका के ओहायो में एक और भारतीय छात्र की मौत

Photo : iStock

Indian Student Killed in US: अमेरिका में भारतीय छात्रों की मौत के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब यहां के ओहायो राज्य में एक और भारतीय छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इसकी जानकारी न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास की ओर से दी गई है। छात्र की पहचान उमा सत्य साई के रूप में हुई है, वह ओहायो के क्लीवलैंड में रहकर पढ़ाई कर रहा था।

दूतावास की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "एक्स" पर कहा गया कि ओहायो के क्लीवलैंड में भारतीय छात्र उमा सत्य साई की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से काफी दुखी हूं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और वह भारत में परिवार के साथ संपर्क में है। दूतावास की ओर से कहा गया कि छात्र के शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

कई छात्रों की हो चुकी है संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

बता दें, अमेरिका में भारतीय छात्रों की मौत का मामला नया नहीं है। 2024 की शुरुआत से ही यहां कई छात्रों की संदिग्ध परिस्थतियों में मौत हो चुकी है। बीते महीने 34 साल के क्लासिकल डांसर अमरनाथ घोष की मिसौरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले 23 साल के भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र समीर कामथ की थी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वहीं, 2 फरवरी को 41 वर्षीय भारतीय मूल के आईटी कार्यकारी विवेक तनेजा को वाशिंगटन में एक रेस्तरां के बाहर हमले के दौरान गंभीर चोटें आई थीं, अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

हाल के महीनों में सातवीं मौत

अमेरिका में हाल के महीनों में किसी भी भारतीय की यह सातवीं मौत का मामला है। इसको लेकर भारतीय छात्रों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। बता दें, अमेरिका में भारतीय स्टूडेंट्स पर इससे पहले भी कई बार हमले हो चुके हैं । इसके बाद से वाशिंगटन में भारतीय दूतावास भारतीय छात्रों से संपर्क साधे हुए है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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