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वो 'हरा घर' जिसे विनाशकारी बाढ़ भी नहीं हरा पाई, चौथी मंजिल तक पहुंचा पानी और फिर ऐसे बची 6 जिंदगियां...खौफनाक दास्तां

लगभग डेढ़ घंटे तक पूरा परिवार मौत और जिंदगी के बीच फंसा रहा। जब पानी का विकराल स्तर थोड़ा कम होना शुरू हुआ, तो आसपास के मोहल्ले के साहसी स्थानीय लोग और बचावकर्मी उनकी मदद के लिए आगे आए।

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हरा घर जो बना तबाही के बीच उम्मीद का प्रतीक (X)

Nepal Flood Story: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच एक हल्के हरे रंग के दो मंजिला घर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जब उफनती त्रिशूली नदी का मटमैला पानी, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आसपास की इमारतों को ताश के पत्तों की तरह बहा ले जा रहा था, तब यह घर किसी चट्टान की तरह डटा रहा। अब इस 'मिरेकल हाउस' के मालिक प्रकाश ने उस खौफनाक दिन और अपनी जान बचाने के संघर्ष की पूरी कहानी साझा की है।

पानी में गाड़ी बहती देखी और हम ऊपर भागे

एक मीडिया हाउस बात करते हुए घर के मालिक प्रकाश ने बताया कि जब बाढ़ की चेतावनी मिली, तब वह अपनी पास की दुकान पर थे। वह तुरंत भागकर घर पहुंचे और अंदर मौजूद परिवार के 5 सदस्यों को बाहर निकलने को कहा। लेकिन जैसे ही वह बाहर आए, पानी का बहाव इतना तेज था कि उनकी गाड़ी पलट चुकी थी। कोई और रास्ता न देखकर, प्रकाश सहित घर में मौजूद सभी 6 लोग इमारत की ऊपरी मंजिल और छत की तरफ भागे।

चौथी मंजिल भी डूबी, सबसे ऊपरी छत बना आखिरी सहारा

बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि वह मकान की चौथी मंजिल तक पहुंच गया। प्रकाश के अनुसार, पानी चौथी मंजिल तक आ चुका था। नीचे सब कुछ डूब चुका था। हम किसी तरह भागकर इमारत के सबसे ऊपरी हिस्से यानी छत के आखिरी कोने पर पहुंचे।

परिवार के सभी लोग ऊपर एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े थे, लेकिन प्रकाश का मन एक अनजाने डर से कांप रहा था। उनका एक बेटा उस वक्त घर पर नहीं था, वह सुबह स्कूल गया हुआ था। प्रकाश बताते हैं, हम सब साथ थे, लेकिन मेरा बेटा स्कूल गया था। मेरे दिमाग में बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि अगर हमें कुछ हो गया, तो उसका क्या होगा?

पाइप और रस्सी का पुल बनाकर ऐसे हुआ रेस्क्यू

लगभग डेढ़ घंटे तक पूरा परिवार मौत और जिंदगी के बीच फंसा रहा। जब पानी का विकराल स्तर थोड़ा कम होना शुरू हुआ, तो आसपास के मोहल्ले के साहसी स्थानीय लोग और बचावकर्मी उनकी मदद के लिए आगे आए।

जुगाड़ से बना रेस्क्यू ब्रिज

पड़ोस की एक बची हुई इमारत और इस हरे मकान की छत के बीच स्थानीय लोगों ने एक मजबूत मोटा पाइप टिकाया।

एक-एक कर बचाई जान

पाइप और रस्सियों के सहारे बचाव दल के लोगों ने एक-एक करके परिवार के सभी 6 सदस्यों को उस खतरनाक बहाव के ऊपर से सुरक्षित दूसरी तरफ खींच लिया।

इंजीनियरिंग का कमाल: क्यों नहीं ढहा 40 साल पुराना घर?

सोशल मीडिया पर लाखों लोग हैरान थे कि आसपास के पक्के मकान ढह गए, लेकिन यह घर कैसे टिका रहा? विशेषज्ञों और मकान मालिक प्रकाश ने इसके मुख्य कारण बताए हैं। आरसीसी (RCC) फ्रेम और सरिया मजबूत कनेक्शन: यह मकान कंक्रीट पिलर स्ट्रक्चर पर बना है, जिसमें स्टील रोड्स का मजबूत जाल बिछा हुआ था। इस तरह के फ्रेम पानी के भयंकर साइड-प्रेशर को सहने में सक्षम होते हैं।

40 साल पुराना आरसीसी फाउंडेशन

प्रकाश ने बताया कि चूंकि उनका घर नदी के किनारे था, इसलिए 40 साल पहले इसके निर्माण और नींव की मजबूती पर काफी अधिक ध्यान और पैसा लगाया गया था। इसके अलावा मकान के ठीक पीछे मौजूद पहाड़ी के ढाल ने पानी के सीधे प्रहार को विभाजित कर दिया, जिससे पानी का मुख्य दबाव कटकर दोनों तरफ निकल गया।

तबाही के बीच उम्मीद का प्रतीक

हालांकि प्रकाश का परिवार सुरक्षित बच गया है, लेकिन उनके आसपास का पूरा मोहल्ला, सड़कें और पड़ोसियों के मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। नेपाल सरकार और सेना के हेलीकॉप्टर लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। यह हरा मकान अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि नेपाल की इस सबसे खौफनाक आपदा में चमत्कारिक रूप से बची 'जिंदगी और उम्मीद' का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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