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इमरान खान-बुशरा बीबी को झटका, 80 नेताओं समेत पूर्व PM के PAK छोड़ने पर रोक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 25, 2023, 07:12 PM IST

Pakistan Crisis: पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने दोनों के देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही इमरान खान की पार्टी के 80 नेताओं को भी नो फ्लाई लिस्ट में शामिल किया गया है।

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इमरान खान

Photo : BCCL

Pakistan Crisis: पाकिस्तान इन दिनों गंभीर सियासी संकट से जूझ रहा है। देश में अराजकता अपनी चरम सीमा को भी पार कर चुकी है। स्थिति पुलिस के हाथ से निकलती जा रही है। इस बीच सरकार ने कई प्रांतों में आर्टिकल 245 लागू कर दिया है। इसके तहत इन प्रांतों में कानून व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना के हाथों में चली गई है।

इन सबके बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने दोनों के देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही इमरान खान की पार्टी के 80 नेताओं को भी नो फ्लाई लिस्ट में शामिल किया गया है।

देश में अघोषित आपातकाल

देश के कई प्रांतों में आर्टिकल 245 लागू करने के फैसले के खिलाफ इमरान खान ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इमरान खान की ओर से इसके खिलाफ पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि देश में अघोषित आपातकाल लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि सेना एक्ट के तहत नागरिकों की गिरफ्तारी, जांच और उनके खिलाफ केस दर्ज करना असंवैधानिक है। बता दें, शहबाज शरीफ सरकार ने पंजाब, खैबर पख्तूनख्वाह, बलूचिस्तार और इस्लामाबाद में आर्टिकल 245 लागू किया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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