रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (बाएं) और विदेश मंत्री एस जयशंकर (दाएं) (फोटो साभार: @DrSJaishankar)
India Russia Ties: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। जयशंकर तीन दिवसीय रूस यात्रा में हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दंडात्मक 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है।
पुतिन संग जयशंकर की यह मुलाकात रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ व्यापक बातचीत के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। ऐसा माना जा रहा है कि जयशंकर ने पुतिन संग भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
यह भी पढ़ें: 'मित्र मैक्रों संग हुई अच्छी बातचीत'; PM मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति से फोन पर की बात; इन मुद्दों पर हुई चर्चा
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उन्हें प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ हुई अपनी चर्चाओं से अवगत कराया। वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर हैं। (मैं) वैश्विक स्थिति और यूक्रेन के हालिया घटनाक्रम पर उनके साझा दृष्टिकोण की सराहना करता हूं।’’
यह भी पढ़ें:'इस बार विपक्षी सांसदों को बोलने का नहीं मिला मौका...', मोदी सरकार के मंत्री ने कही बड़ी बात
इससे पहले जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करने और वर्ष के अंत में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘आज की बैठक ने हमें न केवल अपने राजनीतिक संबंधों पर चर्चा करने का, बल्कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने का भी मौका दिया है। इसलिए, मैं राजनीति, व्यापार, आर्थिक निवेश, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर विचारों का आदान-प्रदान तथा बेशक लोगों के बीच संपर्क की आशा करता हूं।’’
सनद रहे कि नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने जयशंकर की तीन दिवसीय रूस यात्रा को लेकर कहा कि उनकी यात्रा का मकसद दीर्घकालिक और वक्त की कसौटी पर कसी गई भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।