US Iran War Expense : ईरान के खिलाफ जारी युद्ध अब अमेरिका के लिए सिर्फ सैन्य चुनौती नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक संकट भी बनता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कांग्रेस को बताया है कि युद्ध पर अब तक 37.5 अरब डॉलर (करीब ₹3,56,250 करोड़) खर्च किए जा चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के सामने 87 अरब डॉलर (करीब ₹8,26,500 करोड़) की अतिरिक्त फंडिंग की मांग भी रखी है। बढ़ते युद्ध खर्च, सैनिकों की मौत और नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले यह मुद्दा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता दिख रहा है।
छह महीने में हजारों करोड़ का खर्च
कांग्रेस की सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि 37.5 अरब डॉलर के खर्च में अब तक का वास्तविक सैन्य खर्च और 30 सितंबर तक होने वाले अनुमानित खर्च दोनों शामिल हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह आंकड़ा किस आधार पर तैयार किया गया है। इससे पहले मार्च में सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका का खर्च 11.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इससे साफ है कि युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, उसकी कीमत भी उतनी तेजी से बढ़ रही है।
अब क्यों मांगे गए ₹8.26 लाख करोड़?
पेंटागन ने कांग्रेस से 87 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की है। इसमें से 67 अरब डॉलर सीधे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए खर्च किए जाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले महीने भी लगभग 90 अरब डॉलर के अतिरिक्त रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा था। अब कांग्रेस में इस पर तीखी बहस होने की संभावना है क्योंकि कई सांसद पहले ही युद्ध की लागत और रणनीति पर सवाल उठा चुके हैं।
बढ़ रही सैनिकों की मौत और घायल जवान
युद्ध का असर सिर्फ सरकारी खजाने पर नहीं, बल्कि अमेरिकी सेना पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। 430 सैनिक घायल हुए हैं। केवल 7 जुलाई के बाद 100 सैनिक घायल हुए। हालांकि, पेंटागन का कहना है कि घायल हुए 96% सैनिक इलाज के बाद फिर ड्यूटी पर लौट चुके हैं।
इसके बावजूद लगातार बढ़ती हताहतों की संख्या विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे रही है।
मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की मुश्किल बढ़ी
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में अब 6 महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे समय में युद्ध का बढ़ता खर्च ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी लगातार यह मुद्दा उठा रही है कि अरबों डॉलर युद्ध पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि अमेरिकी जनता महंगाई, महंगे घर, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की बढ़ती लागत से जूझ रही है। जनमत सर्वेक्षणों में भी डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलने लगी है और वे युद्ध को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।
कांग्रेस में ट्रंप प्रशासन पर बरसे सांसद
सुनवाई के दौरान डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर तीखे सवाल उठाए। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक सीनेट की वरिष्ठ सदस्य पैटी मरे ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका को एक ऐसे युद्ध में धकेल रहे हैं, जो लंबे समय तक चल सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की आक्रामक बयानबाजी और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने जैसी चेतावनियां अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वहीं, सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने कहा कि प्रशासन के बयान लगातार बदल रहे हैं। कभी कहा जाता है कि युद्ध खत्म होने वाला है, तो कभी नए सैन्य अभियान की बात सामने आती है। इससे जनता और सांसदों दोनों में भ्रम पैदा हो रहा है।
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