अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 60 व्यापारिक साझेदारों पर 10 से 12.5 फीसदी का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब शुक्रवार आधी रात (स्थानीय समयानुसार) को अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की अवधि समाप्त हो रही है। अमेरिका का दावा है कि ये देश बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर लगे प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने में विफल रहे हैं।
हालांकि, भारत के लिए इसमें राहत की खबर है। समाचार एजेंसी ANI से विशेष बातचीत में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि भारत पर शुरुआती योजना के तहत 12.5% टैरिफ लगाया जाना था। लेकिन लेबर प्रैक्टिसेज को लेकर हुई सकारात्मक चर्चाओं के बाद इसे घटाकर Trade Act of 1974 के Section 301 के तहत 10% कर दिया गया है।
Section 301 का इस्तेमाल क्यों?
फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत लगाए गए बड़े टैरिफ को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने Section 122 के तहत 150 दिनों के लिए अस्थायी 10% टैरिफ लगाया था, जो शुक्रवार को खत्म हो रहा है। अब ट्रंप सरकार ने अधिक टिकाऊ कानूनी प्रावधान Section 301 का रुख किया है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ प्रतिबंध या सीमा शुल्क लगाने का अधिकार देता है जो अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार नीतियां अपनाते हैं।
99% अमेरिकी आयात पर पड़ेगा असर
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने कहा, "अमेरिका के पास लगभग एक सदी से बंधुआ मजदूरी पर आयात प्रतिबंध लागू है। अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही करें।" नया शुल्क अमेरिका में होने वाले कुल 99 फीसदी आयात को प्रभावित करेगा। इसके अलावा, USTR कार्यालय ने 16 प्रमुख देशों की जांच भी शुरू की है, जो अमेरिकी आयात का 70% हिस्सा हैं। इन पर ओवरप्रोडक्शन कर वैश्विक बाजार में कीमतें गिराने का आरोप है।
