Exclusive: हंतावायरस (Hantavirus) को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का के प्रेसिडेंट जेफरी पी. गोल्ड (Jeffrey P. Gold) ने Timesnownews.com को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में साफ कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह संक्रमण सीमित स्तर पर है और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। बता दें कि नेब्रास्का वही जगह है जहां हंतावायरस के संदिग्ध मरीजों को क्वारंटीन किया गया है। हाल ही में अमेरिकी सेना, नेब्रास्का के गवर्नर, चीफ मेडिकल ऑफिसर और यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का के प्रेसिडेंट ने वायरस की स्थिति पर पहला राष्ट्रीय संबोधन भी दिया था।
‘सीमित प्रकोप, घबराने की जरूरत नहीं’
यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का के प्रेसिडेंट डॉ. गोल्ड ने कहा, “घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह एक सीमित प्रकोप है और वायरस को अच्छी तरह समझा जा चुका है। संक्रमण की आशंका वाले लोगों को सावधानीपूर्वक निगरानी और क्वारंटीन में रखना सही कदम है।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हंतावायरस को लेकर लोगों में डर तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर Andes Variant को लेकर चिंता ज्यादा है, क्योंकि यह उन दुर्लभ हंतावायरस स्ट्रेन्स में से एक माना जाता है, जिसमें इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की आशंका देखी गई है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि हंतावायरस में कोविड-19 जैसी “महामारी फैलाने की क्षमता” नहीं है, लेकिन डॉ. गोल्ड ने माना कि इस खास सब-टाइप पर अभी और रिसर्च की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “Andes Variant के बारे में काफी जानकारी मौजूद है, लेकिन इस विशेष सब-टाइप को बेहतर तरीके से समझने तक हम पूरी सावधानी बरतेंगे। इस पर रिसर्च लगातार जारी है।”
कितना लंबा हो सकता है संक्रमण का समय?
हंतावायरस को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसकी incubation period यानी संक्रमण के बाद लक्षण दिखने की अवधि को लेकर है। डॉ. गोल्ड ने बताया कि पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स के अनुसार यह अवधि आठ हफ्तों तक हो सकती है, हालांकि Andes Variant के ज्यादातर मामलों में लक्षण दो हफ्तों के भीतर सामने आ जाते हैं। कई मामलों में तो कुछ ही दिनों में संक्रमण दिखाई देने लगता है। उन्होंने कहा, “यह संभवतः इस बात पर निर्भर करता है कि संक्रमण किस तरीके से हुआ और शरीर में वायरल लोड कितना था।”
फेफड़ों पर हमला करता है वायरस
विशेषज्ञों के अनुसार Andes Variant इसलिए भी खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह फेफड़ों पर गंभीर असर डाल सकता है। गंभीर संक्रमण की स्थिति में सांस लेने में दिक्कत और शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया जानलेवा साबित हो सकती है। डॉ. गोल्ड ने कहा कि संक्रमित या संभावित संक्रमित लोगों की लगातार मेडिकल निगरानी बेहद जरूरी है, क्योंकि फिलहाल हंतावायरस के लिए FDA से मंजूर कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है।उन्होंने कहा, “फेफड़ों में संक्रमण और शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया जानलेवा हो सकती है। इसलिए संक्रमित लोगों की नजदीकी निगरानी जरूरी है। फिलहाल कोई FDA-अप्रूव्ड एंटीवायरल नहीं है, लेकिन रिसर्च दवाएं और सपोर्टिव केयर उपलब्ध हैं।”
क्या सुरक्षित हो चुका है MV Hondius जहाज?
इस बीच सबसे बड़ा सवाल उस क्रूज जहाज MV Hondius को लेकर भी बना हुआ है, जहां से संक्रमण से जुड़े मामले सामने आए थे। जब उनसे पूछा गया कि जहाज को दोबारा सुरक्षित घोषित करने की प्रक्रिया क्या होगी, तो डॉ. गोल्ड ने कहा कि यह पूरी तरह क्रूज कंपनी के प्रोटोकॉल पर निर्भर करेगा।
