पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा लगातार दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। यहां ईसाई और हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण के नए मामले उस स्थिति को उजागर करते हैं, जिसे 'व्यवस्थित संकट' कहा जाता है। मूवमेंट फॉर सॉलिडैरिटी एंड पीस के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल लगभग 1,000 ईसाई और हिंदू लड़कियों (उम्र 12 से 25 वर्ष) का अपहरण किया जाता है।
अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर धर्मपरिवर्तन
आलम ये है कि पुलिस अक्सर कार्रवाई करने से बचती है। जुबली कैंपेन और ओपन डोर्स जैसी मानवाधिकार संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अकेले 2024 में ही 10 साल तक की उम्र की पीड़िताएं सामने आई हैं। IANS की रिपोर्ट के अनुसार कई पीड़ित आजीवन आघात और सामाजिक कलंक झेलती हैं, जबकि अदालतें अक्सर अपहरणकर्ताओं के इस दावे को मान लेती हैं कि लड़कियों ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करते हुए निकाह किया।
2 साल बाद जान बचाकर भागी लड़की
मई 2023 में मोहम्मद अदनान और उसके पिता ने हथियार के बल पर मुस्कान का अपहरण कर लिया था, जिसके बाद नाबालिग को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया। नाबालिग को अदनान की 'पत्नी' घोषित किया गया। मुस्कान को बार-बार यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। जून में, पंजाब के शेखपुरा जिले के मुरीदके की 14 वर्षीय मुस्कान लियाकत लगभग दो साल बाद कैद से भाग गई। कैद से निकलने के बाद मुस्कान ने बताया कि उसे लोहे की छड़ी से पीटा गया और ईसाइयों के लिए अपमानजनक शब्द कहे गए। जबरन गर्भधारण के दौरान यातना के बाद उनका गर्भपात हो गया। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान में मुस्कान का मामला इकलौता नहीं है।
अपहरण कर धर्मपरिवर्तन
इस साल 19 जून को चार हिंदू भाई-बहन, जिया (22), दीया (20), दिशा (16) और गणेश कुमार (14) का सिंध के शाहदादपुर से अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के दो दिनों बाद एक ऑनलाइन वीडियो में इन भाई-बहनों को उनके नए नामों के साथ नमाज पढ़ते हुए दिखाया गया। कट्टरपंथी इस कदम से खुश थे, लेकिन इन बच्चों के परिवार पर जो बीती, उसे शायद ही कोई समझ सके।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति खराब
इस बीच, जबरन धर्मांतरण को अपराध घोषित करने वाले प्रस्तावित कानून को धार्मिक दबाव समूहों के विरोध के कारण बार-बार असफलता का सामना करना पड़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में बढ़ती कट्टरता और राज्य की निष्क्रियता के कारण अल्पसंख्यक समुदाय और अधिक असुरक्षित होते जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका, से अपील की है कि वे पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को अल्पसंख्यक सुरक्षा में ठोस सुधारों से जोड़ें।
