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चांद से आई बड़ी खुशखबरी: चंद्रयान-1 ने किया था जो दावा वो हुआ सच, चीनी वैज्ञानिकों को चांद की 'मिट्टी' में मिला पानी

Water in Lunar Soil: भारत के चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के सूर्य के प्रकाश वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं के रूप में जलयोजित खनिजों के संकेतों का पता लगाया था। अब चीनी वैज्ञानिकों को चांद ने चांद की सतह पर पानी के अणुओं को खोज निकाला है।

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चांद की सतह पर मिले पानी के अणु।

Photo : iStock

Water in Lunar Soil: पृथ्वी के बाद इंसान अंतरिक्ष में पानी की तलाश कर रहा है। इंसानों की यह खोज चांद तक पहुंच चुकी है। यहां कई मिशन भेजे जा रहे हैं। सिर्फ भारत, अमेरिका, रूस के बाद चीन ने भी चांद की सतह पर कई मिशनों को उतारा है। अब यहां से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। चीनी वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर पानी के अणुओं को खोज निकाला है। खास बात यह है कि भारत के चंद्रयान-1 ने पहले ही इस बात के संकेत दिए थे। अब चंद्रयान के दावे पर मुहर लग गई है।

चीन के चांग ई-5 मिशन द्वारा चंद्रमा से लाए गए मिट्टी के नमूनों का अध्ययन कर रहे चीनी वैज्ञानिकों को चंद्रमा की मिट्टी में पानी के अणु मिले हैं। यह जानकारी चाइनीज एकेडमी आफ साइंसेज (सीएएस) ने दी है। हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के अनुसार, यह अनुसंधान बीजिंग नेशनल लेबोरेटरी फॉर कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स और सीएएस के भौतिकी संस्थान तथा अन्य घरेलू अनुसंधान संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अनुसंधान रिपोर्ट 16 जुलाई को पत्रिका नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुई।

मिट्टी के नमूनों में मिला पानी

सीएएस ने मंगलवार को कहा कि 2020 में चांग ई-5 मिशन द्वारा लाए गए चंद्रमा की मिट्टी के नमूनों के आधार पर चीनी वैज्ञानिकों ने आणविक जल से युक्त एक जलयोजित खनिज पाया है। चांद पर पानी की तलाश में जुटे दुनियाभर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए यह बड़ी सफलता है। चांद की सतह पर पानी के अणु मिलने से वैज्ञानिकों की उम्मीद बढ़ गई है।

भारत के चंद्रयान ने दिए थे संकेत

वर्ष 2009 में, भारत के चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के सूर्य के प्रकाश वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं के रूप में जलयोजित खनिजों के संकेतों का पता लगाया था। इसके उपकरणों में नासा का मून मिनरलॉजी मैपर (एम3) भी शामिल था जो एक इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर है, जिसने चंद्रमा पर खनिजों में पानी की खोज की पुष्टि करने में मदद की।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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