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शेख हसीना से घबराई बांग्लादेशी सरकार! मीडिया को कड़ा निर्देश, पूर्व पीएम के बयानों का न करें प्रसारण

बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई-अगस्त के जन-आंदोलन के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के तहत दोषी ठहराई गईं और भगोड़ा घोषित पूर्व पीएम शेख हसीना के बयानों एवं भाषणों के प्रसारण पर रोक लगाई हुई है।

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शेख हसीना से घबराई बांग्लादेशी सरकार

Photo : AP

Sheikh Hasina- बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश के सभी मीडिया संस्थानों (टीवी, रेडियो, प्रिंट और डिजिटल) को निर्देश जारी कर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी बयान या भाषण को प्रकाशित यान प्रसारित न करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि अदालत के आदेशों और राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन कर बयानों का प्रसारण करने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

शेख हसीना के बयानों-भाषणों के प्रसारण पर रोक

बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने जुलाई-अगस्त के जन-आंदोलन के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के तहत दोषी ठहराई गईं और भगोड़ा घोषित पूर्व पीएम शेख हसीना के बयानों एवं भाषणों के प्रसारण पर रोक लगाई हुई है। यह प्रतिबंध पारंपरिक जनसंचार माध्यमों के साथ-साथ सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू होता है।

नफरती भाषण हटाने के निर्देश

ट्रिब्यूनल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, ICT विभाग और बांग्लादेश दूरसंचार नियामक आयोग (BTRC) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि शेख हसीना के बयानों का प्रसारण रोकते हुए उनके पूर्व के विवादित और 'घृणास्पद भाषणों' को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाए। बांग्लादेश की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (NCSA) ने भी देश की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए मीडिया घरानों से अपील की है।

अदालती अवमानना की दी चेतावनी

किसी सजायाफ्ता और भगोड़े आरोपी के बयानों को प्रसारित करना राष्ट्रीय कानूनों और अदालती अवमानना की श्रेणी में आता है। एजेंसी के अनुसार, इस प्रकार के बयानों से देश की आंतरिक शांति, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मीडिया का एक वर्ग अभी भी शेख हसीना के बयानों को जगह दे रहा है। सरकार ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जुलाई के ऐतिहासिक जन-अभ्युत्थान की भावना और इसमें शहीद हुए लोगों के बलिदान का सर्वोच्च सम्मान किया जाना आवश्यक है। मीडिया को भी जवाबदेही दिखाते हुए अदालती आदेशों और राष्ट्रीय हित का पालन करना चाहिए।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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