Trump Asylum Ban: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपीलीय कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत शरण देने की सुविधा को निलंबित कर दिया गया था। यह आदेश रिपब्लिकन राष्ट्रपति की अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर प्रवासन पर नकेल कसने की योजना का एक प्रमुख स्तंभ था।
अपीलीय कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की अवैध प्रवासन पर सख्ती की नीति को बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। कोर्ट के मौजूदा आदेश के बाद एक बात तो साफ हो गई कि जो लोग खतरे से भागकर अमेरिका पहुंचते हैं, वे अब भी सीमा पर शरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन को झटका
कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट सर्किट के लिए 'यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स' के तीन जजों की पीठ ने कहा कि अमेरिकी इमिग्रेशन कानून लोगों को सीमा पर शरण के लिए आवेदन करने का अधिकार देता है और राष्ट्रपति इसका उल्लंघन नहीं कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, पीठ ने स्पष्ट किया कि कार्यपालिका कानून से ऊपर नहीं है और राष्ट्रपति के आदेश से कानूनी अधिकारों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
ACLU के वकील ने फैसले का किया स्वागत
एसीएलयू के वकील ली गेलर्न्ट ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय उन लोगों के लिए बेहद अहम है, जो जोखिम होने की वजह से भागकर अमेरिका पहुंचे हैं और जिन्हें ट्रंप प्रशासन के 'अवैध और अमानवीय' कार्यकारी आदेश के कारण शरण के दावों पर सुनवाई तक का मौका नहीं दिया गया था।"
इस फैसले को जज जे. मिशेल चाइल्ड्स द्वारा लिखा गया था, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नियुक्त किया था। वहीं, जज जस्टिन वॉकर, जिन्हें ट्रंप ने नियुक्त किया था, ने आंशिक असहमति जताई। जज कॉर्नेलिया पिलार्ड, जिन्हें बराक ओबामा ने नियुक्त किया था, भी इस मामले की सुनवाई में शामिल थीं।
