ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस यानी AITC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा तय कर दी है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें और जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मिलेगा। इसके बाद चुनाव आयोग को अंतिम फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया अधिकतम चार महीने में पूरी करनी होगी।
यह विवाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो गुटों के बीच AITC के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी चुनाव आयोग से पूछा था कि वह इस मामले का अंतिम निपटारा कितने समय में कर सकता है।
दोनों गुट चार हफ्ते में पूरी करें अपनी दलील
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर एफिडेविट और काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। यानी दोनों गुटों को अपने दावे, दस्तावेज और एक-दूसरे की दलीलों के जवाब इस समय-अवधि में आयोग के सामने रखने होंगे। इसके बाद जब दोनों पक्षों की प्लीडिंग पूरी हो जाएगी, तब चुनाव आयोग को मामले पर सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेने के लिए तीन महीने मिलेंगे।
चुनाव चिन्ह आदेश के पैरा 15 के तहत मामला
AITC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत चुनाव आयोग के सामने पेंडिंग है। इसी प्रावधान के तहत किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में विभाजन की स्थिति में उसके नाम और चुनाव चिन्ह पर दावों का फैसला किया जाता है।
ममता बनर्जी ने 17 सितंबर के फैसले को दी चुनौती
ज्ञात हो कि ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के 17 सितंबर 2026 के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आयोग ने विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों गुटों को AITC का मूल नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है।
