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राजस्थान का ऐसा मंदिर, जहां किसी भगवान की नहीं बुलेट की पूजा की जाती है, रहस्य जान चौंक जाएंगे आप

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 2, 2023, 10:52 AM IST

राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है, जो अपने रहस्यों के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का नाम है - बुलेट बाबा मंदिर। यह मंदिर राजस्थान के पाली जिले में स्थित है, जिसे लेकर आसपास के लोगों की काफी मान्यता है।

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बुलेट बाबा मंदिर (फोटो साभार - ट्वीटर)

KEY HIGHLIGHTS
  • राजस्थान में है बुलेट बाबा मंदिर
  • मंदिर में भगवान की नहीं बुलेट की पूजा की जाती है
  • बेहद ही चमत्कारी है मंदिर

Bullet Baba Mandir Rajasthan: भारत में कब-कहां क्या दिख जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। और तो और इनके रहस्यों की बात ही निराली है, जो सिर्फ किवदंती पर ही चल रहा है। कुछ ऐसा ही है राजस्थान का एक मंदिर, जिसमें भक्त दर्शन करने तो जाते हैं लेकिन वहां कोई भगवान नहीं है। यह बात थोड़ी चौंका देने वाली है। लेकिन ये सच है।

दरअसल, राजस्थान के पाली जिले में स्थित इस मंदिर का नाम 'ओम बन्ना धाम' है। मंदिर का बुलेट का गहरा संबंध होने के कारण इसे बुलेट बाबा मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 (Royal Enfield Bullet 350) रखी गई है, जिसकी पूजा की जाती है। मंदिर के बुलेट होने के रहस्यों पर बात की जाए तो वो भी थोड़ा अजीब है। यह मंदिर तीन दशक पुराना है। जी हां, पाली जिले के चोटिला गांव में स्थित यह मंदिर करीब 35 साल पुराना है, मंदिर में रखी बुलेट भी गांव के ही एक निवासी की है, जिनकी मृत्यु एक एक्सीडेंट में हो गई थी। उनका नाम ओम सिंह राठौड़ था, जो गांव के ठाकुर जोग सिंह राठौड़ के बेटे थे।

बुलेट बाबा मंदिर के पीछे की कहानी

दुर्घटना के बाद उनके शव और बुलेट को पुलिस ने कब्जे में लिया और बाइक को थाने ले गई। इसके बाद जो हुआ, वो पुलिस वालों के साथ-साथ आसपास के लोगों के लिए भी काफी आश्चर्य वाली बात थी। हुआ ये कि पुलिस स्टेशन में रखी बाइक पुलिस स्टेशन से ही गायब हो गई और दूसरे दिन सुबह दुर्घटना स्थल पर मिली। पुलिस वालों ने सोचा किसी ने शायद मजाक किया होगा। तो उन्होंने बाइक को पुलिस स्टेशन लाकर बेड़ियों को जकड़कर रख दिया। लेकिन फिर वही घटना हुई, दूसरे दिन सुबह बाइक दुर्घटना स्थल पर ही मिली। तीसरे दिन, सभी पुलिसकर्मी जाग रहे थे, यह देखने के लिए कि आखिर कौन है जो ऐसा कर रहा है। लेकिन जो हुआ, उसे देखने के बाद सभी के होश उड़ गए। सभी के आंखों के सामने से बाइक में बंधी बेड़ियां खुली और बाइक उसी स्थान पर जाकर रुक गई। लेकिन इसे ले जाने वाला कोई नहीं था।

फिर इस घटना के बारे में जब सभी को पता चला तो ठाकुर जोग सिंह राठौड़ ने अपने बेटे की याद में वहीं पर एक मंदिर का निर्माण करवा दिया, जिसे आज बुलेट बाबा के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर को लेकर आसपास के लोगों की काफी श्रद्धा जुड़ी हुई है। ऐसे में इस मंदिर में दर्शन करना तो बनता है, तो आप कब जा रहे हैं बुलेट बाबा मंदिर..। तो आपको यह स्टोरी (Trending Story) कैसी लगी, कमेंट कर हमें जरूर बताएं।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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