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'सुबह 3 बजे उठना, वीकेंड में काम करना...' भारतीय मूल के शख्‍स ने कॉलेज के बाद की जिंदगी पर किया पोस्‍ट, सोशल मीडिया पर यूं बयां किया दर्द

Viral Post: अपनी पोस्‍ट में यूजर ने लिखा कि, 'जब मैं पहली बार DMV में आया, तो मैंने 20 के दशक की शुरुआत में सपनों की ज़िंदगी जीने की कल्पना की जैसा कि हम टीवी पर देखते हैं या सोशल मीडिया पर रोमांटिक होते हैं।'

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स्नातक गौरव चिंतामनीदी।

Viral Post: अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय मूल के व्यक्ति की एक पोस्‍ट इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इस पोस्‍ट में उसने यूनिवर्सिटी से कॉर्पोरेट जीवन के संघर्षों के बारे में बताया है। चैपमैन यूनिवर्सिटी से स्नातक गौरव चिंतामनीदी ने अपनी पोस्ट में पहले वर्ष के इमोशनल और फिजिकल बोझ के बारे में बताया। उन्होंने शेयर किया स्नातक होने के बाद, वह देश के आधे हिस्से में चले गए, जो उनके जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में से एक था। अब, एक प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी में सहायक स्टोर मैनेजर के रूप में, उन्होंने कहा कि वह सप्ताह में 60 घंटे तक काम करते हैं, कॉलेज के बाद उनकी कल्पना के विपरीत जीवन।

अपनी पोस्‍ट में उन्‍होंने लिखा कि, 'जब मैं पहली बार DMV में आया, तो मैंने 20 के दशक की शुरुआत में सपनों की ज़िंदगी जीने की कल्पना की जैसा कि हम टीवी पर देखते हैं या सोशल मीडिया पर रोमांटिक होते हैं। मैंने खुद को 9 से 5 बजे तक काम करते हुए, काम के बाद सहकर्मियों के साथ ड्रिंक करते हुए, मेट्रो में अजनबियों से बातचीत करते हुए देखा, जो अंततः मेरे करीबी दोस्त बन गए। मैंने सोचा कि वीकेंड ब्रंच, कॉफी शॉप साइड प्रोजेक्ट और नए कौशल विकसित करने के लिए देर रात ऑनलाइन पाठ्यक्रमों से भरा होगा। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी।' वे दावा करते हैं कि, पिछले साल भर में उन्होंने हफ़्ते में 50 से 60 घंटे काम किया है। कई दिन तो वे शुरुआती शिफ्ट के लिए सुबह 3 बजे उठ जाते हैं।

चिंतामनीदी ने बताया, 'मैंने अपने 95% वीकेंड काम करते हुए बिताए हैं। और जिन दुर्लभ दिनों में छुट्टी मिलती है, मैं इतना थक जाता हूं कि कुछ भी नहीं कर पाता। मैंने खुद को बिस्तर पर लेटे हुए इंस्टाग्राम पर डूमस्क्रॉलिंग करते हुए पाया, लगातार छह दिनों के काम से थका हुआ, अपने सीमित खाली समय का उपयोग हजारों मील दूर रहने वाले दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने में कर रहा था। नए शहर में नए संबंध बनाना उतना आसान नहीं था जितना मैंने उम्मीद की थी। मैं यह भी सोचने लगा: क्या मैं कॉलेज में शीर्ष पर था?' उन्‍होंने सवाल उठाया कि, 'सच्चाई यह है: मैं नहीं था। लेकिन कॉलेज से वास्तविक दुनिया में मानसिक बदलाव? यह मेरी अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन था।' वे पोस्‍ट के अंत में लिखते हैं कि, उनकी पोस्ट का उद्देश्य शिकायत करना नहीं था। इसके बजाय, यह उन सभी लोगों के लिए था जो समायोजित होने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुझाव देते हुए यूजर ने कहा कि, 'यदि आप भी अपने स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में हैं, और एडजस्‍ट होने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। संदेह, वियोग या मोहभंग की भावनाएँ जितना हम सोचते हैं, उससे कहीं अधिक आम हैं।'

इस पोस्‍ट को कई प्रोफेशनल लोगों ने पसंद किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक यूजर ने लिखा, 'आत्मनिरीक्षण और सलाह बहुत अच्छी लगी जी! जैसा कि आपने कहा, 20 का दशक निस्संदेह हममें से कई लोगों के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय है। इतने सारे बदलाव और समायोजन होते हैं, कि अंततः आपके द्वारा बताए गए इन स्वस्थ मानसिकता को अपनाना महत्वपूर्ण है। आप पिछले साल वास्तव में बहुत आगे बढ़ गए हैं, और आपकी लचीलापन भी।' दूसरे ने कहा कि, 'इसे पोस्ट करने के लिए धन्यवाद! यह बहुत उत्साहवर्धक था, खासकर इसलिए क्योंकि मैंने कुछ सप्ताह पहले ही स्नातक की उपाधि प्राप्त की है!'

Shaswat Gupta
शाश्वत गुप्ताauthor

पत्रकारिता जगत में पांच साल पूरे होने जा रहे हैं। वर्ष 2018-20 में जागरण इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्‍युनिकेशन से Advance PG डिप्लोमा करने के बाद मीडिया जगत में दस्तक दी। 2019 में दैनिक जागरण से पत्रकारीय जीवन का आरंभ हुआ। इसके बाद जागरण न्‍यू मीडिया, दैनिक भास्‍कर और इंडिया टीवी में सेवाएं दीं। अप्रैल 2023 से टाइम्‍स नाउ नवभारत (https://www.timesnowhindi.com/) के साथ यह सफर अनवरत‍ जारी है। परंपरागत मीडिया से प्रारंभ हुआ करियर अब आधुनिक यानी डिजिटल मीडिया तक पहुंच चुका है। ग्राउंड रिपोर्टिंग से शुरू हुई यह यात्रा लोकल/हाइपरलोकल डेस्‍क, प्रादेशिक डेस्‍क, सोशल मीडिया डेस्‍क, नेशनल डेस्‍क से अब वायरल डेस्‍क तक पहुंच चुकी है। करीब साढ़े चार साल के इस करियर में अविस्‍मरणीय अनुभव रहे हैं। दैनिक जागरण में पहली पारी के दौरान बिकरू कांड जैसी बड़ी और ज्‍वलन्‍त घटना की कवरेज करने का अवसर मिला। प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया दोनों ही मंचों पर बेहतरीन ढंग से खबर का प्रस्‍तुतिकरण किया। प्रिंट मीडिया की प्रादेशिक डेस्‍क पर कार्य करते हुए कानपुर सिटी, कानपुर देहात, इटावा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, फतेहपुर, औरैया, जालौन, उन्‍नाव, फर्रुखाबाद और कन्‍नौज संस्‍करण की जिम्‍मेदारी संभाली। इन सभी डेस्‍क का कार्य निष्‍पादित करते हुए हर ब्रेकिंग खबर का प्रिंट व डिजिटल दोनों माध्‍यमों में बेहतरीन प्रस्‍तुतिकरण किया। तत्‍पश्‍चात् जागरण न्‍यू मीडिया के हाइपरलोकल सेक्‍शन की लॉन्चिंग में यूपी टीम के सक्रिय सदस्‍य रहे। 2019 से लेकर 2022 तक कोरोना की तीनों लहरों की कवरेज की। इस दौरान लॉकडाउन और ऑक्‍सीजन संकट से ऊपजे हालात पर कई स्‍टोरीज कीं। उत्‍तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2021 में अलग-अलग दिनों में होने वाली अलग-अलग स्‍थानों की वोटिंग, काउंटिंग और रिजल्‍ट से जुड़ी खबरों को पाठकों तक बखूबी पहुंचाया। इस दौरान खबरों की प्‍लानिंग, लाइव ब्‍लॉग लाइव करने के साथ मल्‍टीपल स्‍टोरीज करने का अवसर मिला। 2021 में माफिया मुख्‍तार अंसारी की बांदा जेल में वापसी पर भी प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर कवरेज की। ढाई साल में उत्‍तर प्रदेश के अंदर हुई इस उथल-पुथल के बाद कन्‍नौज के पियूष जैन कांड की खबर को ब्रेक किया। इस केस में रेग्‍युलर कवरेज करने के अलावा कई एक्‍सक्‍लूसिव स्‍टोरीज करने का मौका भी मिला। तत्‍पश्‍चात् कानपुर मेट्रो से जुड़े कार्यों की कवरेज कर औपचारिक तौर पर पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दौरे और प्रथम कॉरिडोर के उद्घाटन की कवरेज करने के साक्षी रहे। उतार-चढ़ाव से भरा डिजिटल मीडिया का यह पहला अनुभव काफी शानदार रहा और बेहतरीन कवरेज से यूपी टीम में कानपुर सेक्‍शन को दूसरा सर्वाधिक Pageviews वाला सेक्‍शन बनाने में योगदान दिया। दैनिक भास्‍कर (DB Digital) के साथ उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भगवा लहर के साक्षी रहे। डिजिटल मीडिया के दूसरे पड़ाव में प्रदेश की चुनावी सरगर्मी को भांपने का अवसर मिला। इसके साथ-साथ उत्‍तर प्रदेश की सैकड़ों तहसील, ब्‍लॉक व गांव इत्‍यादि की दैनिक खबरों का नियोजन कर उन्‍हें फ्लैश करने की जिम्‍मेदारी का निर्वाह किया। दूसरे पड़ाव में उत्‍तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश को खबरों के लिहाज से करीने से समझा और स्‍थानीय क्षेत्रों की समस्याओं को बड़े स्‍तर तक पहुंचाने का काम किया। विधानसभा चुनाव की छोटी-बड़ी खबरों को ब्रेक करने के साथ-साथ ऑब्‍जर्वेशन आधारित मल्‍टीपल स्‍टोरीज करने का अवसर भी मिला।इंडिया टीवी में समाचार लेखन और प्रस्‍तुतिकरण का एक नया अनुभव प्राप्‍त करने का सौभाग्‍य मिला। यू-ट्यूब की दुनिया में खबरों के महत्‍व, लेखन और प्रासंगिकता को समझने का अवसर मिला। जिसके बाद पंजाबी गायक स‍िद्धू मूसेवाला मर्डर केस और महाराष्‍ट्र के सियासी संकट की खबर को ब्रेक किया। यूपी में निर्माणाधीन एक्‍सप्रेस-वे पर वीडियो पैकेज बनाकर दर्शकों के सम्‍मुख यूट्यूब ओरिएंटेड एक्‍सक्‍लूसिव स्‍टोरी पेश की। राजू श्रीवास्‍तव-मुलायम सिंह यादव का निधन, श्रद्धा वाल्‍कर मर्डर केस, जोशीमठ की प्राकृतिक आपदा और द्रौपदी मुर्मू के राष्‍ट्रपति बनने के सफर पर कई वीडियो और उनकी LIVE स्‍ट्रीमिंग करने का मौका मिला। इनके अलावा साल 2022 में हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के व‍िधानसभा चुनाव एवं दिल्‍ली एमसीडी चुनाव से जुड़े वीडियो पर खबरों की कवरेज (यू-ट्यूब पर), लाइव स्‍ट्रीमिंग की। चैनल के शो 'आप की अदालत' की री-लॉन्चिंग पर टीम के साथ को-ऑर्डिनेशन से लाइव स्‍ट्रीमिंग और वीडियो पैकेजिंग का अनुभव प्राप्‍त किया। इसके बाद माफिया अतीक अहमद की साबरमती जेल से वापसी और उसके बेटे के एनकाउंटर पर आधारित वीडियोज़ को बेहतरीन इमेज-कंटेंट क्रिएशन के साथ पब्लिश किया। कोई भी खबर न रुके, न छूटे, न चूके...इसी उद्देश्‍य के साथ विविधता से परिपूर्ण इस यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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