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समंदर बना खून का दरिया! 700 से ज्यादा व्हेल और डॉल्फिन का कत्ल, फैरो आइलैंड्स का खौफनाक सच

Faroe Islands Dolphin Slaughter: डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र फैरो आइलैंड्स में 'ग्रिंडाड्रेप' नामक पारंपरिक प्रथा के तहत 700 से अधिक पायलट व्हेल और डॉल्फिन की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे समुद्र का पानी खून से लाल हो गया।

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परंपरा के नाम पर 700 से ज्यादा बेगुनाह व्हेल और डॉल्फ़िन का बेरहम कत्लेआ

Photo : iStock

Faroe Islands Dolphin Slaughter: यूरोप के उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में स्थित फैरो आइलैंड्स से एक विवादित और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां स्थानीय परंपरा के तहत आयोजित सामूहिक शिकार के दौरान 700 से अधिक व्हेल और डॉल्फिन को मार दिया गया। इस घटना के बाद समुद्र तट का बड़ा हिस्सा खून से लाल दिखाई देने लगा। इस दृश्य ने दुनिया भर में पशु अधिकार संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है।

कैसे हुआ नरसंहार?

पर्यावरण संरक्षण संगठन 'सी शेफर्ड' (Sea Shepherd) के अनुसार, स्कॉटलैंड से करीब 200 मील उत्तर में स्थित इस द्वीप पर बुधवार को तीन अलग-अलग जगहों पर यह शिकार अभियान चलाया गया। सी शेफर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय शिकारियों ने नावों की मदद से 'अटलांटिक व्हाइट-साइडेड डॉल्फिन' और 'लॉन्ग-फिन्ड पायलट व्हेल' (Grindadrap Whale Hunt 2026) को घेरकर उथले पानी और तट की तरफ धकेल दिया। इसके बाद हुक और चाकुओं की मदद से उन्हें किनारे पर खींचकर काट डाला गया। इस खौफनाक मंजर को देखने के लिए तट पर बच्चों समेत भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिकार में 402 पायलट व्हेल और करीब 300 डॉल्फिन मारी गईं।

तड़प-तड़प कर मरे बेजुबान जानवर

कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार शिकारियों के पास जानवरों को मारने के लिए जरूरी और अनिवार्य उपकरण (स्पाइनल लांस) कम पड़ गए थे। इस वजह से उन्होंने डॉल्फिन और व्हेल को केवल चाकुओं से गोदकर तड़पने के लिए छोड़ दिया। जानवर कई घंटों तक दर्द से जूझते रहे और आखिरकार खून बह जाने के कारण उनकी मौत हो गई। इस दौरान कई जानवर नावों के प्रोपेलर (पंखों) से कट गए तो कई चट्टानों से टकराकर चोटिल होते रहे।

परंपरा या उसके नाम पर क्रूरता?

फैरो आइलैंड्स, जो डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, इस प्रथा को अपनी 1000 साल पुरानी वाइकिंग संस्कृति का हिस्सा मानता है। उनका तर्क है कि इससे स्थानीय समुदाय को भोजन मिलता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशु अधिकार कार्यकर्ता इसे आधुनिक युग की सबसे बर्बर और अनावश्यक प्रथा मान रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि इस बड़े शिकार से ठीक एक दिन पहले, यहां की संसद ने 'पशु कल्याण अधिनियम' में बदलाव करके शिकार की जाने वाली डॉल्फिन को कानून के दायरे से बाहर कर दिया, ताकि इस क्रूरता को कानूनी रूप से सही ठहराया जा सके। पर्यावरणविदों ने वैश्विक सरकारों से इस नरसंहार पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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