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VIDEO: नानी 75 की उम्र में अकेले भारत गईं...बंटवारे का किस्सा सुनाते भावुक हुआ पाकिस्तानी, सुनकर आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी

Viral Video: 1947 में 13 साल की उम्र में भारत छोड़कर पाकिस्तान गईं हमीदा बेगम को 75 की उम्र में अकेले भारत आने का वीजा मिला। पूरा परिवार डर रहा था कि वे खो न जाएं, पर नानी ने कहा-'अपने घर का रास्ता कोई नहीं भूलता'।

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कहानी ने लोगों को किया भावुक (तस्वीर साभार- @rafayyakbar)

Viral Video: भारत और पाकिस्तान भले ही 1947 के विभाजन के बाद दो अलग-अलग देश बन गए हों, लेकिन सरहद के दोनों तरफ रहने वाले उन लोगों के दिलों से 'अपने पुराने घर' की यादें कभी कम नहीं हुईं। जब भी कोई बंटवारे का जिक्र करता है, तो खामोशी छा जाती है। हाल ही में इंटरनेट पर सरहद पार से एक ऐसा ही भावुक वीडियो (Emotional Video) सामने आया है, जिसने विभाजन का दर्द झेल चुकी पीढ़ियों के पुराने जख्मों और खूबसूरत यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।

    पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर राफे अकबर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी स्व. नानी 'हमीदा' की एक अनदेखी और बेहद दिल छू लेने वाली कहानी साझा की है। राफे अकबर वीडियो में बताते हैं कि जब भी विभाजन या भारत-पाकिस्तान की बात होती है, तो उन्हें सबसे पहले अपनी नानी की याद आती है। वे बताते हैं, "अगर पूरे पाकिस्तान में कोई ऐसा इंसान था जो क्रिकेट मैच के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ही टीमों को एक साथ सपोर्ट करता था, तो वो मेरी नानी थीं। राफे कहते हैं कि वे अपनी नानी से बचपन से भारत के किस्से और कहानियां सुनकर ही बड़े हुए हैं। शहर भले छूट गया था, रिश्ते पीछे छूट गए थे, लेकिन उनका दिल हमेशा भारत में बसे उस पुराने घर में ही अटका रहा। राफे के अनुसार, उनकी अम्मी और नानी की जिंदगी की सबसे बड़ी एक ही ख्वाहिश थी-'एक बार फिर से भारत जाकर अपना पुराना घर देखना'। इस सपने को पूरा करने के लिए उनके परिवार के कुल 7 लोगों ने भारतीय वीजा के लिए अप्लाई किया। 6 लोगों का वीजा रिजेक्ट हो गया और केवल 75 वर्षीय नानी का वीजा अप्रूव हुआ। (पासपोर्ट के रिकॉर्ड्स के अनुसार, नानी हमीदा का जन्म 1934 के आसपास गुड़गांव में हुआ था और बंटवारे के समय उनकी उम्र महज 13 साल रही होगी)। देखें वीडियो...

    अकेले की सरहद पार

    75 साल की उम्र में नानी का अकेले सरहद पार भारत जाना पूरे परिवार के लिए चिंता का विषय था। हर कोई डर रहा था कि इतनी उम्र में वे अकेले कैसे संभालेंगी या कहीं रास्ता न भटक जाएं। लेकिन, नानी के पास इस डर का बहुत ही खूबसूरत जवाब था- "भला कोई इंसान अपने ही घर का रास्ता कैसे भूल सकता है?" नानी अकेले भारत आईं, अपने पुराने शहर (गुड़गांव) में बिताए पलों को जिया और अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी इच्छा पूरी करके पाकिस्तान लौटीं। भारत से लौटने के कुछ समय बाद ही उनका देहांत हो गया।

    कहानी सुन भावुक हुए लोग

    राफे कहते हैं कि नानी के जाने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे बंटवारे को अपनी आंखों से देखने वाली आखिरी पीढ़ी थीं। पहली पीढ़ी अपने साथ यादों का गुबार लेकर आई थी, दूसरी पीढ़ी ने कहानियां सुनीं और तीसरी पीढ़ी के पास अब सिर्फ उन किस्सों के कुछ अंश बचे हैं। राफे भावुक होते हुए कहते हैं कि आज भले ही दोनों देशों के बीच कड़वाहट और दूरियां बढ़ गई हों, लेकिन मोहब्बत, इंसानियत और सरहद पार की ये सच्ची कहानियां हमेशा जिंदा रहनी चाहिए। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो पर लाखों लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लोग लाइक्स से ज्यादा कमेंट्स में अपनी और अपने दादा-दादी/नाना-नानी की बंटवारे से जुड़ी भावुक कहानियां शेयर कर रहे हैं।

    Kaushlendra Pathak
    कौशलेंद्र पाठकauthor

    कौशलेंद्र पाठक टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कार्यरत हैं। मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उनका सफर ग्राउंड रिपोर्टिंग से डिजिटल डेस्क तक फैला, जहां उन्होंने कंटेंट की विविध शैलियों को नजदीक से समझा। अजब-गजब, अनोखी, सोशल और ट्रेंडिंग कंटेंट पर उनकी गहरी पकड़ और तेज न्यूज सेंस ने उन्हें डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कौशलेंद्र का ध्यान हमेशा ऐसे कंटेंट पर रहता है जो रीडर्स को नई, दिलचस्प और अनजानी कहानियों से रूबरू कराए—हर बार कुछ अलग, कुछ नया।

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