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किसने कहा कि मर्द को दर्द नहीं होता और वह रोता नहीं! स्टेशन पर सबसे छिपकर रो रहे शख्स का Video देख पसीज जाएगा आपका दिल

सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो हमें बताता है कि पुरुष भी इमोशंस रखते हैं। समाज अक्सर कहता है कि मर्द नहीं रोते, लेकिन सच यह है कि वे रोते हैं लेकिन सबके सामने नहीं, बस छिपकर और अकेले में।

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अकले सबसे छिपकर रोते दिखा शख्स (Instagram/@tilakdevdubey)

वैसे तो कोई पुरुष जल्दी रोता नहीं है लेकिन अगर कोई मर्द आपको रोते हुए दिख जाए तो आप समझ जाइएगा कि वह अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है और वह बहुत ही दुख में है। एक पुरुष को बचपन से ही कठोर बनाया जाता है। हालात और समाज उसे इसी तरह के पाठ पढ़ाते हैं कि वह कठोर बन सके। बचपन में बच्चा जब रोता है तो उसे लोग समझाते हैं कि लड़के रोते नहीं, चुप हो जा। ऐसे में एक मर्द बचपन से ही अपने दुख-दर्द और आंसुओं को छिपाना अच्छे से सीख जाता है लेकिन यह बात 100% सही है कि एक मर्द को भी दर्द होता है और वह भी रोता है लेकिन दुनिया को वह अपने आंसू कभी नहीं दिखाता, वह रोता है मगर सबसे छिपकर। ऐसे में एक पुरुष के आंसू और दर्द को इस वक्त सोशल मीडिया पर एक यूजर ने बखूबी बयां किया है।

यूजर ने शेयर किया भावुक वीडियो

तिलक दुबे नाम के एक यूजर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @tilakdevdubey पर सबसे छिपकर रोते हुए एक शख्स का वीडियो पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि बोरीवली रेलवे स्टेशन पर वह शख्स प्लेटफॉर्म पर अकेला बैठ ट्रेन का इंतजार कर रहा था। शख्स बहुत ही परेशान नजर आ रहा था। उसका सिर झुका हुआ था और उसकी आंखें नम थीं। वह शख्स सबकी नजरों से छिपकर रोए जा रहा था। तिलक ने वीडियो के कैप्शन में पूरी कहानी लिखी, जो दिल को छू गई।

सबसे छिपकर रो रहा था शख्स

तिलक बताते हैं कि वे अपनी ट्रेन मिस कर चुके थे। अगली ट्रेन आधे घंटे बाद थी, तो वे बैठकर इधर-उधर देखने लगे। प्लेटफॉर्म खाली और शांत था। तभी उनकी नजर बाईं ओर पड़ी। वहां एक और आदमी चुपचाप बैठा था। उसका सिर झुका हुआ, आंखें नम। वह रो रहा था, लेकिन ऐसे कि कोई नोटिस न करे। शांत रोना, जो सिर्फ राहत मांगता है, लोगों का अटेंशन नहीं। तिलक उस शख्स को देख अपना इंतजार भूल गए। वे उसके पास गए और पूछा, "क्या आप ठीक हैं?" आदमी ने ज्यादा कुछ नहीं कहा। बस बोला, "कुछ याद आ गया... पूछने के लिए शुक्रिया।" फिर चुप्पी। वह खाली पटरियों को घूरता रहा, जैसे कोई ऐसी ट्रेन का इंतजार कर रहा हो जो कभी नहीं आएगी। शायद कोई खोया हुआ रिश्ता या खुद का पुराना रूप। तिलक वापस बैठ गए। रोशनी टिमटिमा रही थी, दुनिया धीरे चल रही थी। बस एक विचार आया – मर्द भी रोते हैं, लेकिन चुपचाप। इसलिए नहीं कि कमजोर हैं, बल्कि चुप्पी ही दर्द की भाषा है। तिलक ने यूनिवर्स से प्रार्थना की कि इस आदमी को सबसे अच्छी खुशी मिले।

वीडियो को देख भावुक हुए लोग

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल होने के बाद लाखों लोगों ने इसे देखा, लाइक और शेयर किया है। सबने तिलक की सहानुभूति की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, "आपने इसे इतनी खूबसूरती से कहा—पुरुषों का नरम पक्ष दिखाया। भगवान आपको, उसे और हर जरूरतमंद को आशीर्वाद दे।" दूसरे ने कहा, "ठीक है, पूछने के लिए शुक्रिया। कुछ शब्द बड़ा बदलाव लाते हैं। कम से कम उसे पता चलेगा कि दयालु लोग हैं जो केयर करते हैं।" तीसरे ने कमेंट किया, "हर मर्द इस दर्द से गुजरता है। एक झप्पी मदद करती है, भाई। उम्मीद है वह इस वक्त भी मजबूत रहेगा।"

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

Pankaj Yadav
पंकज यादवauthor

पंकज यादव टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल और ट्रेंडिंग कंटेंट तैयार करते हैं। कंटेंट राइटिंग में 6 वर्षों का अनुभव रखने वाले पंकज सोशल मीडिया ट्रेंड्स, ह्यूमन इंटरेस्ट और ऑफबीट न्यूज दिलचस्प और यूजर-फ्रेंडली अंदाज में लिखने में माहिर हैं और अबतक आठ हजार से अधिक कंटेंट प्रकाशित कर चुके हैं।

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