Why tracks not stolen: रेलवे ट्रैक की पटरी को चोरी करना सुनने में आसान लग सकता है, लेकिन हकीकत में यह लगभग नामुमकिन काम है। यही वजह है कि बड़े-बड़े अपराधी भी इसे चुराने की कोशिश नहीं करते। इसके पीछे कई मजबूत और व्यावहारिक कारण हैं, जो इस काम को बेहद मुश्किल और जोखिम भरा बना देते हैं। सबसे पहली बात, रेलवे की पटरी बहुत भारी होती है। एक सामान्य पटरी का छोटा सा टुकड़ा भी सैकड़ों किलो वजन का होता है। इतनी भारी चीज़ को उठाना, काटना और कहीं ले जाना बिना बड़े वाहन और कई लोगों की मदद के संभव नहीं है। यह काम अकेले या चोरी-छिपे करना बहुत कठिन है।
साधारण लोहे से नहीं बनती रेलवे की पटरी
दूसरी बड़ी वजह है इसका मजबूत मटेरियल। रेलवे की पटरी साधारण लोहे से नहीं, बल्कि खास तरह के मजबूत स्टील से बनाई जाती है। यह इतना सख्त होता है कि इसे काटना या तोड़ना आसान नहीं होता। इसके लिए खास मशीनों और उपकरणों की जरूरत पड़ती है, जो आसानी से उपलब्ध भी नहीं होते। तीसरी बात, पटरी को जमीन पर बहुत मजबूती से लगाया जाता है। इसे कंक्रीट के स्लीपर, बोल्ट और क्लिप के जरिए कसकर जोड़ा जाता है। इसे खोलने में काफी समय और मेहनत लगती है। बिना सही औजार और टीम के इसे हटाना लगभग असंभव है।
कोई भी कबाड़ी या स्क्रैप डीलर इसे खरीदने से है डरता
इसके अलावा, चोरी के बाद इसे बेचना भी आसान नहीं है। रेलवे की पटरियों पर खास पहचान चिन्ह होते हैं, जिससे तुरंत पता चल जाता है कि यह रेलवे की संपत्ति है। कोई भी कबाड़ी या स्क्रैप डीलर इसे खरीदने से डरता है, क्योंकि पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। सबसे बड़ी बात, इसके लिए कानून बहुत सख्त है। रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध माना जाता है। अगर इससे कोई हादसा हो जाए, तो सजा बहुत भारी हो सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो, इस काम में मेहनत बहुत ज्यादा है, फायदा लगभग नहीं के बराबर है और खतरा बेहद बड़ा है। इसलिए कोई भी समझदार व्यक्ति इस जोखिम को उठाने की हिम्मत नहीं करता।
