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नासिक में प्याज की कीमत में उछाल; 1 ही दिन में प्रति किलो 8 रुपये तक बढ़ गए दाम; दिल्ली भेजा जाएगा 850 मीट्रिक टन कांदा

Food Inflation: हाल ही में कीमतों में यह बढ़ोतरी प्याज की कीमतें काफी कम रहने के दौर के बाद हुई है। 2025 को छोड़कर, पिछले पांच वर्षों में अगस्त के दौरान प्याज की औसत थोक कीमत ₹30 प्रति किलो के आसपास रही थी। हालांकि, पिछले साल कीमतें ₹15 से ₹20 प्रति किलो के बीच थीं।

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नासिक में प्याज के दाम में उछाल। (फोटो- istock)

Food Inflation: नासिक में प्याज की कीमतें बढ़कर ₹40 प्रति किलो के आसपास पहुंच गई हैं; एक ही दिन में कीमतों में ₹5 से ₹8 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। खबरों के अनुसार, कुछ बाजारों में थोक कीमतें ₹60 प्रति किलो के करीब पहुंच गई हैं। बढ़ती कीमतों के बीच, ग्राहकों को किफायती दाम पर प्याज उपलब्ध कराने की कोशिश में मंगलवार को एक विशेष ट्रेन से 850 मीट्रिक टन प्याज नासिक से दिल्ली भेजा जाएगा।

पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हैं दाम

हाल ही में कीमतों में यह बढ़ोतरी प्याज की कीमतें काफी कम रहने के दौर के बाद हुई है। 2025 को छोड़कर, पिछले पांच वर्षों में अगस्त के दौरान प्याज की औसत थोक कीमत ₹30 प्रति किलो के आसपास रही थी। हालांकि, पिछले साल कीमतें ₹15 से ₹20 प्रति किलो के बीच थीं।

बढ़ी उत्पादन लागत, किसानों को राहत की उम्मीद

किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतें उचित हैं और आखिरकार उन्हें अपने कुछ नुकसान की भरपाई करने का मौका मिल रहा है। किसान मनोहर नागरे खेती में इस्तेमाल होने वाली चीजों की बढ़ती लागत की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि यूरिया की कीमत बढ़कर ₹350 के आसपास हो गई है, जो मार्च की तुलना में लगभग ₹50 अधिक है। किसानों के अनुसार, उत्पादन लागत अब ₹2,500 प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है।

किसानों का यह भी कहना है कि मई में बेमौसम बारिश से रबी प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा था। स्टोरेज में रखे प्याज का वजन कम हो रहा है और वे सड़ भी रहे हैं। किसानों का दावा है कि स्टोरेज में होने वाले नुकसान के कारण तीन महीनों में उपज का लगभग 30% अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। इसलिए उनका मानना है कि पिछले कई महीनों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए मौजूदा कीमतें जरूरी हैं।

किसान नेता ने सरकार को दी चेतावनी

किसान नेता भरत दिघोले ने सरकार को प्याज की कीमतों को कृत्रिम रूप से नियंत्रित करने की कोशिश करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जब किसानों को कम कीमत पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था, तब उन्हें बहुत कम मदद मिली थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अब किसी भी तरह के दखल से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों में गुस्सा भड़क सकता है। दिघोले ने यह भी आरोप लगाया कि अगर सरकार ने NAFED और NCCF के खरीद और स्टोरेज कार्यों में कथित अनियमितताओं को रोका होता, तो ग्राहकों को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद होता।सरकार को प्याज की कीमतों को कृत्रिम रूप से नियंत्रित करने की कोशिश करने के खिलाफ चेतावनी दी है।

किसानों को धीरे-धीरे स्टॉक बेचने की सलाह

महाराष्ट्र के मार्केटिंग डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और लासलगांव मार्केट कमिटी के पूर्व चेयरमैन जयदत्त होल्कर ने कहा कि सरकार NAFED और NCCF के ज़रिए खरीदे गए प्याज़ को एक स्पेशल ट्रेन से दिल्ली भेजने की योजना बना रही है। इस कदम का मकसद वहां के ग्राहकों को कम कीमत पर प्याज़ उपलब्ध कराना है। होल्कर ने कहा कि किसानों को अपना जमा किया हुआ प्याज़ धीरे-धीरे बाज़ार में लाने की इजाज़त दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्याज़ अप्रैल में बेचा गया होता, तो उस समय ₹1,500 प्रति क्विंटल के आसपास की कीमत भी ठीक रहती। लेकिन किसान अब अपना स्टॉक धीरे-धीरे निकाल रहे हैं, और सरकार को बाज़ार में कोई गड़बड़ी नहीं करनी चाहिए।

15 दिनों में करीब 50% बढ़े दाम

बाजार के जानकारों का कहना है कि लासलगांव बाज़ार में प्याज़ की आवक लगातार बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने मांग में अचानक बढ़ोतरी और 15 दिनों के भीतर कीमतों में लगभग 50% की वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। जानकारों का कहना है कि किसानों को अभी जो कीमतें मिल रही हैं, वे मोटे तौर पर पिछले सालों में अगस्त की औसत कीमतों के बराबर ही हैं। हालांकि, चूंकि पिछले साल अगस्त में प्याज़ की कीमतें असामान्य रूप से कम थीं, ₹20 प्रति किलो से भी कम इसलिए तुलना करने पर मौजूदा कीमतें काफी ज़्यादा लग सकती हैं।

इसके बावजूद, जानकारों का कहना है कि सरकार को मांग में अचानक बढ़ोतरी पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए और जमाखोरी की संभावना पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्याज़ की बढ़ती कीमतों का ग्राहकों पर बेवजह बोझ न पड़े।

atul. Singh
अतुल सिंहauthor

मैं अतुल सिंह,मैं 14 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों को खबरों को कवर करने वाला अनुभवी पत्रकार हूं। वर्तमान में Times Now नवभारत के लिए principal correspondent हूं। मैंने इंडिया टीवी, ज़ी न्यूज़,IBN 7 (न्यूज़ 18),Lemon न्यूज़ जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ भी काम किया है। मनोरंजन,नागरिक मुद्दे ,इंफ्रा,राजनीति,आम और विधानसभा चुनाव और अपराध जैसे विषयों को बखूबी कवर किया है। वर्तमान में मुम्बई ब्यूरो से जुड़ा हुआ हूं। कई राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कई विशेष खबरें भी कवर किया है।

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