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स्विट्जरलैंड की 7 लाख सैलरी भी पड़ सकती है कम! Video में कपल ने बताया विदेश में रहने का पूरा हिसाब-किताब

क्या भारत की 40,000 की सैलरी, स्विट्ज़रलैंड की 7 लाख रुपए की सैलरी से बेहतर हो सकती है? वायरल वीडियो में दोनों देशों की सैलरी, किराया, खर्च और बचत की तुलना कर बताया गया है।

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विदेश की सैलरी का सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप (Instagram/@clogsandcurries)

विदेश में नौकरी करना और लाखों रुपये की सैलरी कमाना आज भी कई लोगों का सपना होता है। अक्सर लोग मानते हैं कि अगर किसी को विदेश में 6 से 7 लाख रुपये महीना मिलने लगे, तो उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। लेकिन क्या सिर्फ बड़ी सैलरी ही अच्छी जिंदगी की गारंटी होती है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इसी सवाल पर नई बहस छेड़ दी है।

भारत और स्विट्ज़रलैंड की कमाई और खर्च की तुलना

एक डच-भारतीय कपल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें भारत और स्विट्ज़रलैंड की कमाई और खर्च की तुलना की गई। वीडियो का मकसद यह दिखाना था कि सिर्फ सैलरी देखकर किसी देश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि कमाई के बाद आपके पास कितना पैसा बचता है।

भारत या स्विट्ज़रलैंड कहां होती है ज्यादा बचत

वीडियो (Video) में बताया गया कि भारत में अगर किसी व्यक्ति की सैलरी 40,000 रुपए महीना है, तो वह लगभग 20,000 रुपए में किराए का घर ले सकता है। वहीं स्विट्ज़रलैंड में 7 लाख रुपए महीना कमाने वाले व्यक्ति को सिर्फ घर के किराए पर ही करीब 2 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

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यहां का हजार वहां का लाखों रुपए

इसके बाद कपल ने दोनों देशों में रोजमर्रा के खर्चों की तुलना की। उन्होंने बताया कि स्विट्ज़रलैंड में किराने का सामान, हेल्थ पॉलिसी, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और बच्चों की देखभाल जैसी जरूरी चीजों पर भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा खर्च होता है। उदाहरण के लिए, जहां भारत में बच्चों की देखभाल पर लगभग 5,000 रुपए खर्च हो सकते हैं, वहीं स्विट्ज़रलैंड में यही खर्च करीब 1.5 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।

वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रिया

इस वीडियो के वायरल (Viral Video) होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ लोगों का कहना है कि विदेश में ज्यादा कमाई के साथ बेहतर सुविधाएं, साफ-सफाई और बेहतर जीवन स्तर भी मिलता है। वहीं कई यूजर्स का मानना है कि अगर बचत कम हो रही है, तो सिर्फ बड़ी सैलरी का कोई खास मतलब नहीं रह जाता।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

Pankaj Yadav
पंकज यादवauthor

पंकज यादव टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल और ट्रेंडिंग कंटेंट तैयार करते हैं। कंटेंट राइटिंग में 6 वर्षों का अनुभव रखने वाले पंकज सोशल मीडिया ट्रेंड्स, ह्यूमन इंटरेस्ट और ऑफबीट न्यूज दिलचस्प और यूजर-फ्रेंडली अंदाज में लिखने में माहिर हैं और अबतक आठ हजार से अधिक कंटेंट प्रकाशित कर चुके हैं।

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