Holi Special 2025: होली का त्योहार आते ही सोशल मीडिया का कोना-कोना रंगों में सराबोर लोगों की फोटो से भर जाता है। वायरल होती फोटोज में अलग-अलग लोग अपने अनोखे अंदाज में होली खेलते हुए दिखते हैं। ब्रज जैसे कई ऐसे शहर भी हैं जहां पर होली का त्योहार तकरीबन एक महीने पहले से ही शुरू हो जाता है। कोई अबीर-गुलाल उड़ाकर, एक-दूसरे को रंगों से रंगकर होली मनाता है तो कोई डीजे की धुन पर मस्ती करके होली मनाता है। मगर क्या आपको पता है कि, भारत में होली मनाने की एक ही पद्धति नहीं है बल्कि 13 प्रकार से भारत में होली मनाई जाती है और हर फोटो सोशल मीडिया पर वायरल भी होती है। आज हम आपको भारत में मनाए जाने वाले होली के 13 प्रकारों से अवगत कराएंगे:
चिता भस्म होली
भारत के सबसे पुरातन शहर काशी में चिता भस्म होली खेली जाती है, जिसे 'मसान होली' के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि महादेव के प्रिय गण यानी भूत, प्रेत, पिशाच आदि के साथ बाबा चिता भस्म होली खेलने के लिए महाश्मशान में स्वयं आते हैं।

चिता भस्म होली
बाबा मसाननाथ की विधिवत पूजा के साथ ये होली शुरू होती है और फिर जमकर चिता भस्म होली खेली जाती है।
देवर-भाभी होली और दही हांडी
भारत के हरियाणा में ये होली मनाई जाती है। इतना ही नहीं, हरियाणा में दही हांडी भी मनाई जाती है। इसके अंतर्गत सड़क पर छाछ से भरा बर्तन टांगा जाता है। जहां एक ओर पुरुष बर्तन को तोड़ने की कोशिश करते हैं तो वहीं, महिलाएं उन पर पानी डालती हैं।

देवर-भाभी होली
लठमार होली
होली का असली मजा भारत में केवल और केवल ब्रज में देखने को मिलता है। यहां पर करीब एक महीने तक होली चलती है। बरसाना की लठमार होली पर होरियारे मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव जैसे क्षेत्रों में एक महीने तक पारंपरिक होली का आनंद लेते हैं।

लठमार होली
बरसाने में होली से कुछ दिन पहले लड्डूमार होली भी खेली जाती है। इसमें लड्डू इधर-उधर फेंके जाते हैं और भक्ति गीत गाए जाते हैं।
फूलों की होली
वृंदावन के कृष्ण मंदिरों में फूल, पवित्र जल और हर्बल रंगों को छिड़ककर ये होली मनाई जाती है।

फूलों की होली
इसी तर्ज पर पुष्कर में फूलों की होली होती है और वहां के लोगों में उत्साह और ऊर्जा का संचार करती है।
कुमाउनी होली
उत्तराखंड के कुमाउ क्षेत्र में हर साल कुमाउनी होली धूम-धाम से मनाई जाती है। इस होली का उत्साह लोगों में करीब दो महीनों तक रहता है।

कुमाउनी होली
संगीत समारोह के तौर पर यहां होली मनाई जाती है जिसे बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली के नाम से भी जाना जाता है।
फगुआ होली
बिहार की फगुआ होली को भोजपुरी होली भी कहते हैं। यहां की होली में रंगों के अलावा कीचड़ का भी इस्तेमाल किया जाता है।

फगुआ होली
होली के उल्लास में यहां के लोग भांग भी चढ़ाते हैं। इन सबके बाद भोजपुरी में लोकगीत गाए जाते हैं जिससे माहौल खुशनुमा हो जाता है।
बंगाली होली
पश्चिम बंगाल में मनाई जाने वाली इस होली केा बसंत उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। शांति निकेतन में इसे धूमधाम से मनाया जाता है।

बंगाली होली
इस पर्व पर यहां होली से एक दिन पहले डोल जात्रा निकाली जाती है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक साड़ी पहनकर राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं।
रंग पंचमी
महाराष्ट्र में मनाई जाने वाली इस होली की शुरुआत होलिका के पुतले को जलाने के बाद होती है। यह समारोह पूर्णिमासी दशमी पर सूर्यास्त के बाद किया जाता है...अगले दिन, जिसे फाल्गुन कृष्णपक्ष पंचमी होती है, जिसे रंगपंचमी कहा जाता है।

रंग पंचमी
इस अवसर पर पूरनपोली जरूर बनाया जाता है जिसका स्वाद त्योहार के मजे को दोगुना कर देता है।
शिग्मो फेस्टिवल
गोवा का यह त्योहार ग्रामीण लिबास के साथ होली का अनुभव कराता है। बता दें कि, ये त्योहार पर्यटक और अन्य आगंतुकों के लिए मनाया जाता है। इसमें स्थानीय लोग सुंदर पोशाक पहनते हैं और एक पूरे जुलूस को लेकर समूहों में सड़कों पर नृत्य करते हैं।

शिग्मो फेस्टिवल
होला मोहल्ला
पंजाब में होली के रंगों के बीच होला मोहल्ला का त्योहार काफी प्रसिद्ध रहने वाला त्योहार है। यह मार्च के महीने में तीन दिनों के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार की तारीख चंद्र कैलेंडर को देखने के बाद निर्धारित की जाती हैं। इस पर्व का मुख्य कार्यक्रम आनंदपुर साहिब में होता है।

होला मोहल्ला
डोला उत्सव
ओडिशा के तटीय क्षेत्र में डोला उत्सव छह दिन तक मनाया जाता है। डोला पूर्णिमा के दिन, महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ति को मंदिर से बाहर लाकर उन्हें भक्तों के सम्मुख रखा जाता है ताकि, भक्त उनके साथ होली खेल सकें। इस मौके पर रंग उड़ाकर, भजन गाते हुए जुलूस निकाला जाता है।

डोला उत्सव
मंजुल कुली
केरल में होली को मंजुल कुली के नाम से जाना जाता है। इस पर्व को गोसरीपुरम थिरुमा के कोंकणी मंदिर में मनाया जाता है। पहले दिन भक्त मंदिर जाते हैं, दूसरे दिन लोग एक दूसरे को रंगीन पानी का छिड़काव करते हैं, जिसमें हल्दी होती है।

मंजुल कुली
याओशांग
मणिपुर में पांच दिनों के लिए ये त्योहार मनाया जाता है और भगवान 'पखंगबा' को श्रद्धांजलि देने के लिए 'यवोल शांग' के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार में बच्चों को दान लेने के लिए हर घर में जाने की अनुमति दी जाती है। दूसरे और तीसरे दिन लड़कियां दान मांगती हैं।

याओशांग
इसके बाद अंत के दो दिनों में लोग एक दूसरे पर पानी और रंग छिड़क कर इस त्योहार को मनाते हैं।
