भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। यूरोपीय आयोग ने EU काउंसिल के सामने भारत के साथ हुए इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और इसे लागू करने की मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा है। अगर काउंसिल से मंजूरी मिल जाती है, तो यह दोनों पक्षों द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होगा।
180 अरब यूरो से ज्यादा का है व्यापार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हर साल वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 180 अरब यूरो से ज्यादा का है। यूरोपीय आयोग के मुताबिक, यह व्यापार करीब 8 लाख यूरोपीय नौकरियों को सपोर्ट करता है। FTA लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच बढ़ने, टैरिफ कम होने और व्यापार से जुड़ी गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की उम्मीद है।
इस समझौते के तहत भारत में EU से आने वाले 96% सामानों के निर्यात पर टैरिफ खत्म या कम किया जाएगा। इससे यूरोपीय निर्यातकों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की ड्यूटी बचाने में मदद मिल सकती है। वहीं, दोनों देशों के उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प और प्रतिस्पर्धी कीमतों का फायदा मिल सकता है।
कारों पर 110% से घटकर 10% तक टैरिफ
FTA में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यूरोपीय आयोग के अनुसार, कारों पर लगने वाला टैरिफ धीरे-धीरे 110% से घटकर 10% तक आ सकता है। वहीं, कारों के पार्ट्स पर लगने वाला टैरिफ अगले 5 से 10 साल में पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। मशीनरी, केमिकल और फार्मास्यूटिकल्स पर भी कई टैरिफ को कम या खत्म करने का प्रस्ताव है।
कृषि क्षेत्र में भी बदलाव
कृषि उत्पादों पर औसतन 36% से ज्यादा के टैरिफ को कम किया जाएगा। वाइन पर टैरिफ शुरुआत में 150% से घटकर 75% और बाद में 20% तक आ सकता है। वहीं, ऑलिव ऑयल पर 45% टैरिफ को पांच साल में धीरे-धीरे खत्म करने की योजना है। हालांकि, बीफ, चिकन, चावल, चीनी और एथेनॉल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस छूट से बाहर रखा गया है, ताकि दोनों देशों के किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। सभी आयातों को EU के फूड-सेफ्टी मानकों को पूरा करना होगा।
दोनों देशों के बीच व्यापार-निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भारत-EU FTA पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी और 2013 में रुक गई थी। इसे 2022 में फिर शुरू किया गया और 27 जनवरी 2026 को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में वार्ताकारों ने समझौता पूरा किया। अब EU काउंसिल को हस्ताक्षर और समझौते के निष्कर्ष की मंजूरी देनी होगी। इसके बाद यूरोपीय संसद की सहमति जरूरी होगी। भारत भी अपनी आंतरिक मंजूरी प्रक्रिया पूरी करेगा। FTA लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
