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ऐसा शहर, जिसके चौराहो और सड़कों का नहीं है कोई नाम.. जानिए कैसे सामान पहुंचाता है डिलीवरी बॉय

  • Authored by: आदित्य साहू
  • Updated Dec 5, 2022, 04:38 PM IST

Ajab Gajab News: हिलगर्मिसन बहुत ही ज्यादा खूबसूरत शहर है, लेकिन इस शहर में किसी चौराहे और किसी सड़क का कोई नाम नहीं है। यह सोचकर ही अजब लग रहा है कि अगर लोगों को कैब से कहीं जाना होता होगा तो वह क्या एड्रेस डालते होंगे। यहां लोगों की जिंदगी थोड़ी मुश्किल तो होगी ही।

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अनोखा शहर (सोशल मीडिया)

KEY HIGHLIGHTS
  • दुनिया का सबसे अजीबोगरीब शहर
  • सड़क-चौराहों का नहीं है कोई नाम
  • जर्मनी में है यह अजीबोगरीब शहर

Ajab Gajab News: आप जिस शहर में रहते होंगे, वहां हर गली, मोहल्ले और सड़क-चौराहों के कुछ न कुछ नाम होंगे। सोचिए अगर आपके शहर में गली-मोहल्लों, सड़क-चौराहों का कोई नाम न हो तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाएगी। डिलीवरी बॉय किस तरह अपना सामान आप तक पहुंचा पाएंगे। अगर आपको कैब से कहीं जाना है तो आप क्या एड्रेस डालेंगे। सोचकर ही अजीबोगरीब लग रहा है। हालांकि, दुनिया में एक शहर ऐसा है, जिसके गली-मोहल्ले, सड़क-चौराहे गुमनाम हैं। इनका कोई नाम नहीं रखा गया है।

गुमनाम सड़कों और चौराहों वाला शहर

इस शहर में किसी चौराहे और किसी सड़क का कोई नाम नहीं है। यह शहर जर्मनी में है, जिसका नाम हिलगर्मिसन है। हिलगर्मिसन बहुत ही ज्यादा खूबसूरत शहर है, लेकिन इस शहर में किसी चौराहे और किसी सड़क का कोई नाम नहीं है। इसके बावजूद यहां के लोग अपने चौराहों और सड़कों को बहुत ही आसानी से पहचान लेते हैं। बता दें कि डिलीवरी बॉय भी बड़ी आसानी से लोगों को उसका पार्सल सही जगह पर पहुंचा देते हैं। 1970 के दशक में हिलगर्मिसन शहर का गठन कई छोटे समुदायों ने किया था।

ऐसे सामान पहुंचाते हैं डिलीवरी बॉय

बता दें कि भले ही शहर के किसी चौराहे और सड़क का नाम नहीं रखा गया है लेकिन घर के नंबरों और पुराने गांव के नाम से बने हुए पतों के द्वारा डिलीवरी बॉय लोगों का सामान आसानी से उनके घरों तक पहुंचा देते हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा चुनौती उन लोगों के लिए है, जो यहां के मूल निवासी नहीं हैं और बाहर से आकर यहां बसे हुए हैं।

करवाया जा चुका है जनमत संग्रह

बता दें कि कुछ साल पहले यहां के लोगों को यह तय करने के लिए जनमत संग्रह करवाया गया था सड़कों और चौराहों को कोई नाम दिया जाय या नहीं। आपको जानकर हैरानी होगी कि जब सड़कों और चौराहों को नाम देने की बात आई तब लोगों ने सड़कों और चौराहों का कोई नाम नहीं देने के पक्ष में ही वोट किया। 60 फीसदी लोग ने जनमत संग्रह में मतदान किया था। वह चाहते थे कि मौजूदा प्रणाली ही बनाई रखी जाय।

आदित्य साहू
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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