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देश का अनोखा स्कूल, जहां संडे को भी होती है पढ़ाई, इस दिन होता है वीक ऑफ, चौंकाने वाला है कारण

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 18, 2023, 04:16 PM IST

देश के सभी स्कूलों में आमतौर पर रविवार को छुट्टी होती है, लेकिन भारत का एक ऐसा स्कूल भी है, जहां संडे को पढ़ाई होती है। यह जानकारी चौंकाने वाली जरूर है, लेकिन ये सच है और ये नियम यहां 101 साल से चला आ रहा है।

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गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय (Image Credit: Facebook)

KEY HIGHLIGHTS
  • बर्धमान में स्थित इस स्कूल में संडे को होती है पढ़ाई
  • 101 साल पुराना है ये नियम
  • नाम है- गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय

Gopalpur Muktkeshi Vidyalaya: स्कूल का नाम सुनते ही सभी को अपना बचपन याद आ जाता है न। वो स्कूल में की गई मस्ती, दोस्तों संग घूमने के लिए स्कूल बंक मारना और बेसब्री से संडे का इंतजार करना। अरे भाई.. संडे को छुट्टी जो मिलती है। लेकिन सोचिए जरा, अगर आपको संडे की छुट्टी ना मिले तो आपको कैसा लगेगा? ये अटपटा सवाल है, आप सोच रहे होंगे कि हर जगह संडे को ही ऑफ होती है तो फिर ऐसा सवाल क्यूं?

दरअसल, पश्चिम बंगाल में एक ऐसा स्कूल है, जहां बच्चे रविवार के दिन भी स्कूल जाते हैं और पढ़ाई करते हैं। जी हां, बंगाल के पूर्वी बर्धमान ज़िले में स्थित गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय (Gopalpur Muktakeshi Vidyalaya) एक ऐसा स्कूल है, जहां रविवार के दिन स्कूल खुला (School Open On Sunday) रहता है। इसके बदले इस स्कूल में सोमवार को छुट्टी होती है। और हां, ये कोई 10 या 20 साल पुराना स्कूल नहीं है। बल्कि 101 साल पुराना स्कूल है, जहां शुरू से यही नियम चला आ रहा है।

Gopalpur Muktkeshi Vidyalaya

संडे को बंद रहता है गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय

ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष की पहचान है यह स्कूल

यह देश का एकमात्र ऐसा स्कूल है, जहां संडे के दिन पढ़ाई होती है। यह स्कूल कोलकाता शहर से 73 किलोमीटर की दूरी पर गोपालपुर गांव (बर्धमान) में स्थित है, जिसकी स्थापना 5 जनवरी 1922 को 13 छात्रों के साथ की गई थी। स्कूल का नाम देवी दुर्गा के अवतार देवी मुक्तकेशी के नाम पर रखा गया है। दरअसल, गोपालपुर मुक्तकेशी विद्यालय की ये परंपरा ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष की पहचान है।

ब्रिटिश शासन के विरोध में रविवार को स्कूल खोलने की परंपरा

इस स्कूल को खोलने के लिए जिन जमींदारों ने 3.3 एकड़ जमीन दी थी, उन्हीं दो जमींदारों (अभिनाश चंद्र हलदर और बिजॉयकृष्ण कुमार) ने ही ब्रिटिश शासन के विरोध में रविवार को स्कूल खोलने की परंपरा की नींव रखी थी। अपने इसी अनोखेपन को लेकर यह स्कूल न सिर्फ कोलकाता में बल्कि पूरे देश में जाना जाता है। इस ऐतिहासिक स्कूल के पहले प्रधानाध्यापक भूपेंद्रनाथ नायक थे, जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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