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'नाटू नाटू' गाने का ऐसा खुमार कि जर्मन एंबेसडर ने भी लगाए ठुमके, दूतावासों को दिया चैलेंज; देखें वीडियो

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 19, 2023, 07:12 AM IST

भारत में जर्मनी के राजदूत डॉक्टर फिलिप ने नाटू नाटू गाने पर डांस करते हुए एक वीडियो साझा किया है, उन्होंने दूतावासों को इन गाने पर डांस करने का चैलेंज भी दिया है।

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भारत में जर्मनी के राजदूत डॉक्टर फिलिप ने नाटू नाटू गाने पर डांस करते हुए एक वीडियो साझा किया (क्रेडिट- @AmbAckermann)

Photo : Twitter

Natu Natu Dance Fever: फिल्म निर्माता एसएस राजामौली की 'RRR'के गाने 'नाटू नाटू' ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रच दिया है। जब से इस गाने ने यह उपलब्धि हासिल की है, देश दुनिया में लोगों के दिलों दिमाग पर यह गाना छाया हुआ है। सोशल मीडिया पर इस गाने पर डांस के कई वीडियो भी सामने आ रहे हैं, लेकिन अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह वीडियो है भारत में जर्मनी के राजदूत डॉक्टर फिलिप एकरमैन का, जिन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया है, जिसमें वह और जर्मन दूतावास के अधिकारी इस गाने पर ठुमके लगाते हुए नजर आ रहे हैं।

पुरानी दिल्ली का है वीडियो

भारत में जर्मनी के राजदूत ने जो वीडियो जारी किया है, वह पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक का है। वीडियो में डॉ. फिलिप और उनकी टीम लाल किले के पास इस गाने पर थिरकती नजर आ रही है। उन्होंने ट्विटर पर वीडियो साझा करते हुए लिखा है, जर्मन के लोग डांस नहीं कर सकते? मैं और मेरी इंडो-जर्मन टीम ने पुरानी दिल्ली में ऑस्कर 95 में नाटू नाटू की जीत का जश्न मनाया। उन्होंने आगे लिखा, ठीक है यह परफेक्ट निहीं है, लेकिन मजा आया।

दूतावासों को कर दिया चैलेंज

डॉ. फिलिप ने अपने इस ट्वीट में दूतावासों को भी चैलेंज दिया है। उन्होंने लिखा, हमें प्रेरित करने के लिए भारत में कोरियाई दूतावास का धन्यवाद। बधाई हो राम चरण और आरआरआर की टीम का स्वागत है। उन्होंने लिखा, दूतावासों के लिए चैलेंज जारी है, अगला कौन है?

बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग कैटेगरी में जीता ऑस्कर

नाटू नाटू ने बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग कैटेगरी में ऑस्कर जीतकर इतिहास रच दिया है। इस गाने को राजामौली की पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म में राम चरण व जूनियर एनटीआर के ऊपर फिल्माया गया है। इस गाने का खुमार इन दिनों सभी के सिर चढ़कर बोल रहा है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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