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छह महीने में ही कंपनी क्‍यों छोड़ देते हैं एम्‍प्‍लॉय ? HR एग्‍जीक्‍यूटिव ने बताए 4 कारण, आप भी जानें

Why Employee Quit Job: HR एग्‍जीक्‍यूटिव के कारण बताने के बाद कमेंट बॉक्‍स में कई लोगों ने अपने एक्‍सपीरिएंस बताए। एक यूजर ने कहा कि, 'मैं और मेरे सहकर्मी भी पिछले कुछ हफ्तों से ऐसी दिक्‍कतें ही झेल रहे हैं।'

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​क्‍यों छह महीने में कंपनी छोड़ते हैं कर्मचारी। (istock)

Why Employee Quit Job: प्राय: देखा जाता है कि कंपनी में ज्‍वाइनिंग के बाद छह महीने के अंदर ही एम्प्‍लॉय वहां जॉब छोड़ देते हैं। इससे मैनेजमेंट को फर्क पड़े या न पड़े लेकिन कंपनी के HR डिपार्टमेंट की मुश्किलें शायद बढ़ जाती हैं। क्‍योंकि ऐसे में उनको दोबारा नए एम्‍प्‍लॉय की खोज करनी पड़ जाती है। फिर उसका टेस्‍ट, इंटरव्‍यू, ऑफर लेटर, सैलरी फिटमेंट जैसी वही कवायद करनी पड़ती है। HR की मुश्किलों को समझते हुए लिंक्‍डइन पर एक यूजर ने कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की 4 वजहें बताई हैं। अपनी पोस्‍ट के माध्‍यम से उन्‍होंने बताया है कि, आखिर ज्‍वाइनिंग के छह महीने बाद ही लोग कंपनी क्‍यों छोड़ देते हैं। उनकी पोस्‍ट को पढ़ने के बाद कई यूजर्स ने अपने एक्‍सपीरिएंस भी शेयर किए।

ये हैं वो प्रमुख 4 कारण

लिंक्डइन उपयोगकर्ता भारती पवार लिखती हैं कि, 'लिंक्डइन उपयोगकर्ता भारती पवार ने लिखा, “कर्मचारी 6 महीने या एक साल में किसी कंपनी को छोड़ने के लिए ज्‍वाइन नहीं करते हैं। वे इसलिए छोड़ देते हैं क्‍योंकि- खराब माहौल, कम वेतन और बिना पैसे का ओवरटाइम, लिमिट से ज्‍यादा काम का दबाव, भाई-भतीजावाद यानी नेपोटिज्‍म और ऑफिस की राजनीति।' अंत में भारती पवार ने कहा कि, 'किसी को भी बार-बार नौकरी छोड़ना पसंद नहीं है। माहौल उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करता है।' इस पोस्‍ट को कुछ घंटे पहले शेयर किया गया था जिसके बाद से अब तक इसे कई लोगों ने लाइक किया है।

यूजर्स ने शेयर किए एक्‍सपीरिएंस

HR एग्‍जीक्‍यूटिव के कारण बताने के बाद कमेंट बॉक्‍स में कई लोगों ने अपने एक्‍सपीरिएंस बताए। एक यूजर ने कहा कि, 'मैं और मेरे सहकर्मी भी पिछले कुछ हफ्तों से ऐसी दिक्‍कतें ही झेल रहे हैं। हम चाहे कितनी भी मेहनत कर लें मेरा मैनेजर हमेशा अपमानित कर डांटता है। यहीं पर एक ईमानदार कर्मचारी की सहनशीलता की परीक्षा अपने चरम पर होती है।' दूसरे यूजर ने कहा कि, 'एचआर को प्रतिभा और प्रबंधन के बीच की खाई को भरना चाहिए, लेकिन ज्यादातर छोटे और मध्‍यम संगठनों में केवल सस्ते लाभ व आधिकारिक बने रहने के लिए एचआर राजनीति पैदा करने वालों के साथ शामिल हो जाते हैं। कॉर्पोरेट जगत में एचआर खलनायकों के नए पर्याय बन गए हैं। मैं दिन-ब-दिन देख रहा हूं कि लोग अपने एक्‍स गर्लफ्रेंड-ब्‍वॉयफ्रेंड की तुलना में एचआर से अधिक नफरत करने लगे हैं।' ऐसे ही कई कमेंट्स से यूजर की पोस्‍ट का पूरा बॉक्‍स भर गया है और अब भी लोग लगातार इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

Shaswat Gupta
शाश्वत गुप्ताauthor

पत्रकारिता जगत में पांच साल पूरे होने जा रहे हैं। वर्ष 2018-20 में जागरण इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्‍युनिकेशन से Advance PG डिप्लोमा करने के बाद मीडिया जगत में दस्तक दी। 2019 में दैनिक जागरण से पत्रकारीय जीवन का आरंभ हुआ। इसके बाद जागरण न्‍यू मीडिया, दैनिक भास्‍कर और इंडिया टीवी में सेवाएं दीं। अप्रैल 2023 से टाइम्‍स नाउ नवभारत (https://www.timesnowhindi.com/) के साथ यह सफर अनवरत‍ जारी है। परंपरागत मीडिया से प्रारंभ हुआ करियर अब आधुनिक यानी डिजिटल मीडिया तक पहुंच चुका है। ग्राउंड रिपोर्टिंग से शुरू हुई यह यात्रा लोकल/हाइपरलोकल डेस्‍क, प्रादेशिक डेस्‍क, सोशल मीडिया डेस्‍क, नेशनल डेस्‍क से अब वायरल डेस्‍क तक पहुंच चुकी है। करीब साढ़े चार साल के इस करियर में अविस्‍मरणीय अनुभव रहे हैं। दैनिक जागरण में पहली पारी के दौरान बिकरू कांड जैसी बड़ी और ज्‍वलन्‍त घटना की कवरेज करने का अवसर मिला। प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया दोनों ही मंचों पर बेहतरीन ढंग से खबर का प्रस्‍तुतिकरण किया। प्रिंट मीडिया की प्रादेशिक डेस्‍क पर कार्य करते हुए कानपुर सिटी, कानपुर देहात, इटावा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, फतेहपुर, औरैया, जालौन, उन्‍नाव, फर्रुखाबाद और कन्‍नौज संस्‍करण की जिम्‍मेदारी संभाली। इन सभी डेस्‍क का कार्य निष्‍पादित करते हुए हर ब्रेकिंग खबर का प्रिंट व डिजिटल दोनों माध्‍यमों में बेहतरीन प्रस्‍तुतिकरण किया। तत्‍पश्‍चात् जागरण न्‍यू मीडिया के हाइपरलोकल सेक्‍शन की लॉन्चिंग में यूपी टीम के सक्रिय सदस्‍य रहे। 2019 से लेकर 2022 तक कोरोना की तीनों लहरों की कवरेज की। इस दौरान लॉकडाउन और ऑक्‍सीजन संकट से ऊपजे हालात पर कई स्‍टोरीज कीं। उत्‍तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2021 में अलग-अलग दिनों में होने वाली अलग-अलग स्‍थानों की वोटिंग, काउंटिंग और रिजल्‍ट से जुड़ी खबरों को पाठकों तक बखूबी पहुंचाया। इस दौरान खबरों की प्‍लानिंग, लाइव ब्‍लॉग लाइव करने के साथ मल्‍टीपल स्‍टोरीज करने का अवसर मिला। 2021 में माफिया मुख्‍तार अंसारी की बांदा जेल में वापसी पर भी प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर कवरेज की। ढाई साल में उत्‍तर प्रदेश के अंदर हुई इस उथल-पुथल के बाद कन्‍नौज के पियूष जैन कांड की खबर को ब्रेक किया। इस केस में रेग्‍युलर कवरेज करने के अलावा कई एक्‍सक्‍लूसिव स्‍टोरीज करने का मौका भी मिला। तत्‍पश्‍चात् कानपुर मेट्रो से जुड़े कार्यों की कवरेज कर औपचारिक तौर पर पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दौरे और प्रथम कॉरिडोर के उद्घाटन की कवरेज करने के साक्षी रहे। उतार-चढ़ाव से भरा डिजिटल मीडिया का यह पहला अनुभव काफी शानदार रहा और बेहतरीन कवरेज से यूपी टीम में कानपुर सेक्‍शन को दूसरा सर्वाधिक Pageviews वाला सेक्‍शन बनाने में योगदान दिया। दैनिक भास्‍कर (DB Digital) के साथ उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भगवा लहर के साक्षी रहे। डिजिटल मीडिया के दूसरे पड़ाव में प्रदेश की चुनावी सरगर्मी को भांपने का अवसर मिला। इसके साथ-साथ उत्‍तर प्रदेश की सैकड़ों तहसील, ब्‍लॉक व गांव इत्‍यादि की दैनिक खबरों का नियोजन कर उन्‍हें फ्लैश करने की जिम्‍मेदारी का निर्वाह किया। दूसरे पड़ाव में उत्‍तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश को खबरों के लिहाज से करीने से समझा और स्‍थानीय क्षेत्रों की समस्याओं को बड़े स्‍तर तक पहुंचाने का काम किया। विधानसभा चुनाव की छोटी-बड़ी खबरों को ब्रेक करने के साथ-साथ ऑब्‍जर्वेशन आधारित मल्‍टीपल स्‍टोरीज करने का अवसर भी मिला।इंडिया टीवी में समाचार लेखन और प्रस्‍तुतिकरण का एक नया अनुभव प्राप्‍त करने का सौभाग्‍य मिला। यू-ट्यूब की दुनिया में खबरों के महत्‍व, लेखन और प्रासंगिकता को समझने का अवसर मिला। जिसके बाद पंजाबी गायक स‍िद्धू मूसेवाला मर्डर केस और महाराष्‍ट्र के सियासी संकट की खबर को ब्रेक किया। यूपी में निर्माणाधीन एक्‍सप्रेस-वे पर वीडियो पैकेज बनाकर दर्शकों के सम्‍मुख यूट्यूब ओरिएंटेड एक्‍सक्‍लूसिव स्‍टोरी पेश की। राजू श्रीवास्‍तव-मुलायम सिंह यादव का निधन, श्रद्धा वाल्‍कर मर्डर केस, जोशीमठ की प्राकृतिक आपदा और द्रौपदी मुर्मू के राष्‍ट्रपति बनने के सफर पर कई वीडियो और उनकी LIVE स्‍ट्रीमिंग करने का मौका मिला। इनके अलावा साल 2022 में हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के व‍िधानसभा चुनाव एवं दिल्‍ली एमसीडी चुनाव से जुड़े वीडियो पर खबरों की कवरेज (यू-ट्यूब पर), लाइव स्‍ट्रीमिंग की। चैनल के शो 'आप की अदालत' की री-लॉन्चिंग पर टीम के साथ को-ऑर्डिनेशन से लाइव स्‍ट्रीमिंग और वीडियो पैकेजिंग का अनुभव प्राप्‍त किया। इसके बाद माफिया अतीक अहमद की साबरमती जेल से वापसी और उसके बेटे के एनकाउंटर पर आधारित वीडियोज़ को बेहतरीन इमेज-कंटेंट क्रिएशन के साथ पब्लिश किया। कोई भी खबर न रुके, न छूटे, न चूके...इसी उद्देश्‍य के साथ विविधता से परिपूर्ण इस यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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