अगर कोई आपको बताए कि उसने हजारों साल पुराना ऐतिहासिक स्थल खोज निकाला है, तो शायद आप भी उसकी बात पर यकीन कर लें। लेकिन इटली में एक शख्स ने लोगों के इसी भरोसे का फायदा उठाया और सालों तक पर्यटकों को ठगता रहा। उसने खुद एक नकली रोमन एम्फीथिएटर जैसा ढांचा तैयार किया और उसे प्राचीन ऐतिहासिक स्थल बताकर लोगों से एंट्री फीस वसूलता रहा।
इटली के विचेंजा शहर का है यह मामला
'द मिरर' की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला इटली के विचेंजा शहर के पास का है। 69 वर्षीय फ्रेंको मालोसो, जो खुद को "वॉन रोजेनफ्रांज" भी कहता था, दावा करता था कि उसने दुनिया का सबसे पुराना खुला रोमन एम्फीथिएटर खोजा है। उसकी कहानी इतनी भरोसेमंद लगती थी कि दूर-दूर से लोग इस जगह को देखने पहुंचने लगे।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें:
शख्स हर टूरिस्ट से वसूलता था 4 हजार रुपये
फ्रेंको हर आने वाले पर्यटक से 35 पाउंड यानी करीब 4 हजार रुपये एंट्री फीस लेता था। वह लोगों को पत्थर के खंभे, सीढ़ियां, मूर्तियां और एक झील दिखाकर कहता था कि ये सभी 393 ईस्वी से भी पहले के हैं। इतना ही नहीं, वह रोमन सम्राट जूलियस सीजर और मशहूर किरदार जूलियट से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां भी सुनाता था ताकि लोग उसकी बात पर आसानी से भरोसा कर लें।
10 साल बाद खुली पूरी पोल
हैरानी की बात यह रही कि उसकी कहानी से सिर्फ पर्यटक ही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित हो गया। यहां तक कि इस जगह को यूरोपीय संघ की फंडिंग वाले एक पर्यटन ऐप में भी शामिल कर लिया गया लेकिन साल 2016 में पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुरातत्व विशेषज्ञों ने जब इस जगह की जांच की तो पता चला कि वहां मौजूद कोई भी चीज प्राचीन नहीं थी। सभी खंभे, मूर्तियां और अन्य संरचनाएं फाइबरग्लास और पेपर-माशे जैसी आधुनिक सामग्री से बनाई गई थीं। यहां तक कि वहां मौजूद झील भी उसी ने बनवाई थी।
अदालत ने सुनाई यह सजा
जांच के बाद भी फ्रेंको अपनी बात पर अड़ा रहा और उसने कई नई कहानियां गढ़ीं। उसने माफिया पर हमला करने और कई लोगों की हत्या तक के दावे किए, लेकिन अदालत ने उसकी किसी भी बात पर भरोसा नहीं किया। करीब 10 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उसे दो साल चार महीने की जेल, 3,000 यूरो का जुर्माना और पूरे इलाके से सभी नकली निर्माण हटाने का आदेश दिया है।
