Delhi Metro Smoking Viral Video : दिल्ली मेट्रो का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक बुजुर्ग शख्स को दिल्ली मेट्रो में बीड़ी पीते हुए देखा जा सकता है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने दिल्ली मेट्रो के एक कोच के अंदर एक व्यक्ति के बीड़ी जलाने और धूम्रपान करने के वीडियो पर रिएक्ट किया। जिस पर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे हैं। DMRC ने लिखा है कि, उनके 'उड़न दस्ते' दिल्ली मेट्रो के अंदर ऐसे आपत्तिजनक व्यवहार पर नजर रखते हैं। मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों से भी अपील की है कि ऐसी घटनाओं को तुरंत उनके (डीएमआरसी) संज्ञान में लाया जाए।
दिल्ली मेट्रो में बीड़ी पीते हुए बुजुर्ग का वीडियो एक्स (पूर्व मे ट्विटर) पर मनीष पांडेय ने शेयर किया था। उन्होंने वीडियो को कैप्शन भी दिया कि, 'दिल्ली मेट्रो में खुलेआम चुंबन के बीच, अब बीड़ी का स्वाद।' इसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति को बीड़ी जलाने के लिए माचिस की तीली का उपयोग करते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो में आप भी देख सकते हैं कि, बुजुर्ग जब बीड़ी पी रहा होता है तो उसके बगल में बैठा एक यात्री खड़ा होता है और चला जाता है। हालांकि काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब बुजुर्ग के व्यवहार में बदलाव नहीं आता तो दूसरा यात्री उसके पैर को थपथपाता है और बीड़ी की ओर इशारा करता है, संभवतः उसे सूचित करता है कि दिल्ली मेट्रो के अंदर धूम्रपान निषेध है।
दिल्ली मेट्रो में धूम्रपान कर रहे एक शख्स के इस वीडियो पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) बने रिएक्ट किया है। उन्होंने लिखा कि, 'हम ऐसे किसी भी आपत्तिजनक व्यवहार का पता लगाने के लिए उड़नदस्तों के माध्यम से यादृच्छिक जांच करते हैं। हम जनता से अपील करते हैं कि वे ऐसे मामलों को तुरंत हमारे संज्ञान में लाएं ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके।' बता दें कि, ये वीडियो एक दिन पहले एक्स पर शेयर किया गया था। तब से इसे 3,000 से ज्यादा बार देखा जा चुका है। कई लोगों ने इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में अपने विचार भी साझा किए।
एक यूजर ने लिखा कि, 'सामाजिक रूप से जिम्मेदार लोग। क्यों कोई बीच-बचाव कर अपराधी से माचिस नहीं छीन सका। जिस किसी ने भी यह क्लिप या वीडियो बनाया है, वह भी ऐसी घटना के लिए समान रूप से जिम्मेदार है।' वहीं, दूसरे ने लिखा कि, 'भयानक, सिस्टम में अगले पड़ाव पर यात्रा की पहचान और समाप्ति का एक अंतर्निहित तंत्र होना चाहिए। सामान्य नागरिक ऐसे लोगों की हिंसक प्रतिक्रिया या अनुसरण से डरकर हस्तक्षेप नहीं करते।'
