इस दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जहां ड्राइवर के लिए ड्राइविंग लाइसेंस लेना कोई आसान काम नहीं है। इन देशों की सूची में चीन का भी नाम शुमार है। यहां ड्राइवरों को गाड़ी चलाने से पहले कई कठिन परीक्षाएं पास करनी पड़ती है। बता दें कि चीन का ड्राइविंग टेस्ट काफी सख्त माना जाता है, ताकि सड़क पर लोग सुरक्षित होकर ड्राइव कर सकें। ऐसे में सड़क हादसों की संभावना भी कम होती है।
सबसे पहले देना पड़ता है थ्योरी टेस्ट
चीन में ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए सबसे पहले वाहन चालकों को थ्योरी टेस्ट देना पड़ता है। इस टेस्ट में ट्रैफिक के नियम, रोड साइन और रोड सेफ्टी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। यह टेस्ट कंप्यूटर पर होता है और इसमें कई तरह के सवाल होते हैं। इस टेस्ट को पास करने के बाद ही ड्राइवर अगले टेस्ट के लिए क्वालिफाई करता है।

सांकेतिक तस्वीर, (Photo Credit - iStock)
ड्राइविंग की ट्रेनिंग
जब ड्राइवर थ्योरी टेस्ट पास कर लेता है तो उसे ड्राइविंग स्कूल में ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। यहां उन्हें कार चलाना, पार्किंग करना और अलग-अलग सड़क स्थितियों में गाड़ी को कैसे संभालना है, यह सिखाया जाता है।

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कठिन प्रैक्टिकल टेस्ट
इस ट्रेनिंग के बाद ड्राइवरों का प्रैक्टिकल टेस्ट होता है, जो काफी चैलेंजिंग और टफ माना जाता है। इस टेस्ट में ड्राइवर को कई तरह की परिस्थितियों में गाड़ी चलाकर दिखानी होती है, जैसे- संकरी सड़क पर गाड़ी चलाना, जिगजैग रास्तों से होकर गुजरना, ढलान पर गाड़ी रोकना और चलाना और गाड़ी को सही तरीके से पार्क करके दिखाना होता है। इन सभी टेस्ट को सही तरीके से पूरा करने के बाद ही उसे पास माना जाता है।

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सड़क पर अंतिम टेस्ट
चीन में कुछ जगहों पर अंतिम टेस्ट रियल सिचुएशन में असली सड़क पर भी लिया जाता है। इसमें देखा जाता है कि व्यक्ति ट्रैफिक के बीच कितनी सुरक्षित और सही तरीके से गाड़ी चला सकता है।
