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Viral Video: हिंदी बोलने पर नाराज हो गए जज साहब, फिर वकील ने जो कहा चुपचाप सुनने लगे

  • Authored by: Ikramuddin
  • Updated Jan 3, 2024, 09:25 AM IST

Viral Video: सामने आए वीडियो में देखेंगे कि हिंदी भाषा में जिरह को लेकर जज और वकील के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। फिर आखिर में जो हुआ बार-बार देखेंगे।

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भाषा को लेकर जज और वकील के बीच हुई तीखी बहस। (फोटो-वीडियो स्क्रीनशॉट)

KEY HIGHLIGHTS
  • हिंदी में जिरह को लेकर भिड़े जज और वकील
  • जज ने मांगा अनुवाद तो भड़क गए वकील साहब
  • फिर जो दिखा बार-बार देखेंगे आप

Viral Video: सोशल मीडिया में जज और वकील के बीच जिरह से जुड़ा एक मजेदार वीडियो छाया हुआ है। इसमें दोनों पक्षों के बीच भाषा को लेकर काफी तीखी नोकझोंक होती है। जज साहब अंग्रेजी में वकील से अपने बात कहने पर जोर डालते हैं, जबकि वकील साहब हिंदी में जिरह करने पर अड़े रहे। इसमें जब जज हिंदी में जिरह करने को तैयार नहीं हुए तो वकील ने ऐसी बात कही कि बेचारे चुपचाप पूरी बात सुनने लगे। कोर्ट रूम में दोनों के पक्षों के बीच बहस से जुड़ा ये वीडियो सोशल मीडिया में हर तरफ छाया हुआ है। वीडियो कुछ ही समय में बड़ी संख्या में व्यूज बटोर चुका है।

हिंदी में जिरह को लेकर भिड़े जज और वकील

वीडियो की शुरुआत में देखेंगे कि वकील हिंदी में बोलते हुए अपना पक्ष रखते हैं। मगर इससे पहले वो कुछ बोल पाते तभी जज ने उन्हें बीच में टोका। उन्होंने अंग्रेजी में पूछा कि हिंदी में पढ़ रहे हैं। क्या उन्हें लगता है कि मैं हिंदी समझ लूंगा। जज ने कहा कि वो हिंदी समझने में सक्षम नहीं है। इसपर वकील ने भी मजेदार जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'हुजूर यही तो रोना है। हम भी अंग्रेजी नहीं समझ पा रहे हैं।' अब जज ने जवाब दिया कि उनकी याचिका खारिज कर दी गई है। अब जिरह कर रहे वकील ने जो बात कही सुनकर चौंक जाएंगे। उन्होंने जज साहब को समझाया कि उनकी याचिका फुल बेंच की लाइट में खारिज करनी चाहिए।

फिर चुप हो गए जज साहब

इसपर दोनों पक्षों के बीच नियमों को लेकर बहस शुरू हो गई। मगर वकील ने ऐसा जवाब दिया कि जज साहब को चुप होना पड़ा। वकील ने कहा, 'नियम हिंदी के पक्ष में हैं। बिना सुने हुए आगे बढ़ने का नियम नहीं है। पहले सुनकर हुजूर को आगे बढ़ना है। आज भी पटना हाईकोर्ट में सभी न्यायमूर्ति सुन रहे हैं।'

यहां देखिए वीडियो

मजेदार है कि जिरह में वकील ने जोरदार तर्क देते हुए कहा, अनुवाद मांगा जा रहा है। मगर हम कहते हैं कि अनुवाद अनुवादक विभाग से मांगा जाना चाहिए। अनुवादक विभाग आजादी के पहले से है। उनको जो तनख्वाह मिलती है उसमें हमारा हिस्सा है। फ्रेम के आखिर में देखेंगे कि वकील का जोरदार तर्क सुनकर जज साहब भी चुप हो गए।

Ikramuddin
Ikramuddin author

<p>पत्रकारिता के पेशे में काम करते हुए करीब 9 साल पूरे हो चले हैं। साल 2011-14 में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज (BRAC) से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से साल 2015 में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में दाखिल हुए और सीखने का सिलसिला आज तक जारी है। पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद सबसे पहले लाइव इंडिया टीवी चैनल के डिजिटल प्लेटफॉर्म में काम करने का मौका मिला। लाइव इंडिया डॉट कॉम में करीब दो साल तक काम किया और बहुत कुछ सीखा। राजनीति, खेल और अपराध के साथ तमाम क्षेत्रों में जमकर खबरें बनाईं और हर दिन कुछ नया सीखने का मौका मिला।चुनाव से जुड़ी बारीकियों और जनता से जुड़े मुद्दों को खबरों की शक्ल में कवर करने का काम इसी संस्थान में रहते हुए सीखा। चुनाव में आम लोगों के बुनियादी मुद्दों को समझने और उन्हें खबरिया प्लेटफॉर्म तक लाने का काम भी बखूबी सीखा। खबरों की बारीकियां सीखने और समझने के दौरान इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म जनसत्ता में काम किया। यहां करीब चार साल के करियर के दौरान खबरों से जुड़ी दूसरी बारीकियों को समझना जारी रखा। यहां ट्रेंडिंग खबरों पर खासा ध्यान रहा। सोशल मीडिया से जुड़ी तमाम बारीकियों को समझने का मौका इसी संस्थान में मिला। जनसत्ता डॉट कॉम में करीब चार साल बिताने के बाद जी मीडिया ग्रुप के इंडिया डॉट कॉम डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने का मौका मिला। यहां वायरल, ऑफबीट, टीवी डिबेट और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से रोचक खबरें बनाई। इंडिया डॉट कॉम में करीब दो साल बिताने के बाद सितंबर 2023 में टाइम्स नेटवर्क की प्लेटफॉर्म Timesnowhindi.com में वायरल टीम का हिस्सा हूं।</p>

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