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पहली बार जनरल कोच का सफर करने पहुंची थी लड़की, अंदर का नजारा देख रह गई दंग, यूजर्स बोले - अब नहीं जाना दीदी..

एक महिला ने पहली बार जनरल कोच में सफर का अपना मुश्किल अनुभव रेडिट पर साझा किया। भीड़ के कारण खड़े होकर दो घंटे बिताने के बावजूद, उन्होंने लोगों के एडजस्ट करने और जीवित रहने के तरीके को देखकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। यह अनुभव कठिन लेकिन प्रेरणादायक रहा।

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जनरल कोच में खड़े होकर करना पड़ा सफर (Social Media)

KEY HIGHLIGHTS
  • जनरल कोच में सफर का मुश्किल अनुभव
  • दो घंटे खड़े होकर करना पड़ा सफर
  • जमकर वायरल हो रहा ये पोस्ट

Experience Of General Coach: आज भी लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन एक पसंदीदा विकल्प है, जो आरामदायक होने के साथ-साथ यात्रा के आनंद को भी बढ़ाता है। हर ट्रेन कोच में सफर करने वाले यात्रियों की अपनी अलग-अलग कहानियाँ और अनुभव होते हैं। हाल ही में, एक महिला ने अपने पहले जनरल कोच के अनुभव को साझा किया, जो मुश्किलों और मानवीय Resilience से भरा हुआ था।

महिला ने बताया कि उन्होंने उम्मीद की थी कि जनरल कोच में कम से कम उन्हें बैठने की जगह तो मिल जाएगी। हालांकि, जब ट्रेन स्टेशन पर आई, तो कोच में इतनी भीड़ थी कि उन्हें चढ़ने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। किसी तरह धक्का-मुक्की करते हुए वह ट्रेन के अंदर दाखिल हुईं, लेकिन उन्हें इतनी भी जगह नहीं मिली कि वह बैठ सकें। मजबूरन उन्हें दो घंटे तक खड़े होकर ही यात्रा करनी पड़ी। यह अनुभव उनके लिए शारीरिक रूप से काफी थकाने वाला साबित हुआ।

जनरल कोच में खड़े होकर करना पड़ा सफर

हालांकि, इस मुश्किल अनुभव के बावजूद, महिला ने एक महत्वपूर्ण सीख हासिल की। उन्होंने लिखा कि जनरल कोच में सफर करना निश्चित रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने यह भी देखा कि लोग किस तरह से परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाते हैं और जीवित रहने के लिए संघर्ष करते हैं। यह देखकर उनके मन में उन लोगों के लिए और भी अधिक सम्मान पैदा हुआ। इस अनुभव को महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपने यूजरनेम 'byu/SuitableAttention430' के तहत साझा किया, जिसे हजारों लोगों ने पढ़ा और अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। यह कहानी हमें दिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मानवीय भावना और संघर्ष की शक्ति अटूट रहती है।

Kishan Gupta
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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