नोएडा : सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच शुरू किए गए स्काईवॉक का असर नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन पर साफ दिखाई देने लगा है। स्काईवॉक खुलने के बाद एक्वा लाइन पर रोजाना यात्रियों की संख्या में 20 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में जहां औसतन करीब 70 हजार यात्री प्रतिदिन सफर कर रहे थे, वहीं सितंबर में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 85 हजार पहुंच गया है।
स्काईवॉक को 28 अगस्त को आम यात्रियों के लिए खोला गया था। इसके बाद सेक्टर-51 की एक्वा लाइन और सेक्टर-52 की दिल्ली मेट्रो ब्लू लाइन के बीच आवाजाही आसान हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों स्टेशनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर यात्रियों की संख्या पर पड़ा है।
स्टेशन बदलने में अब नहीं करनी पड़ती लंबी पैदल दूरी
स्काईवॉक बनने से पहले दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच इंटरचेंज करने वाले यात्रियों को करीब एक किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। इसके अलावा सड़क पार करने की परेशानी भी रहती थी। अब एयर-कंडीशंड स्काईवॉक और ट्रैवलेटर की सुविधा से यात्री एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक अपेक्षाकृत आसानी से पहुंच सकते हैं।
नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णा करुणेश के अनुसार, स्काईवॉक शुरू होने के बाद रोजाना यात्रियों की संख्या पहले के करीब 70 हजार से बढ़कर लगभग 85 हजार हो गई है। उनके मुताबिक, यह करीब 21 फीसदी की वृद्धि है।
जून से अगस्त तक भी बढ़ रही थी यात्रियों की संख्या
NMRC के आंकड़ों के अनुसार, एक्वा लाइन पर औसत दैनिक यात्रियों की संख्या जून में 60,705, जुलाई में 61,811 और अगस्त में 73,298 रही थी। सितंबर में अब तक यह औसत करीब 85 हजार तक पहुंच गया है। हालांकि अधिकारियों ने बढ़ोतरी के पीछे स्काईवॉक की शुरुआत को प्रमुख कारण बताया है।
तीन साल पहले शुरू हुआ था निर्माण
सेक्टर-51 और सेक्टर-52 को जोड़ने वाले इस स्काईवॉक की परियोजना मार्च 2023 में शुरू की गई थी। इसे एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन निर्माण के दौरान कई तकनीकी और अन्य अड़चनों के कारण काम में देरी हुई। खुदाई के दौरान भूमिगत मेट्रो केबल मिलने के बाद डिजाइन में बदलाव करना पड़ा। बाद में सेक्टर-51 स्टेशन के प्रवेश मार्ग में एक बीम बाधा बनी, जिसके चलते स्काईवॉक के डिजाइन और लंबाई में भी बदलाव किया गया।
इन बदलावों के कारण परियोजना की लागत भी बढ़ी। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती अनुमान करीब 25 करोड़ रुपये था, जो बाद में बढ़कर लगभग 33 करोड़ रुपये हो गया। स्काईवॉक के शुरू होने से अब दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन के बीच यात्रियों के लिए इंटरचेंज अधिक सुविधाजनक हो गया है।
