Car Insurance Claim Settlement: कार का एक्सीडेंट होने के बाद इंश्योरेंस क्लेम करना अपने आप में एक बेहद भागदौड़ भरी प्रक्रिया है। बहुत बार ऐसा भी होता है कि लोग इंश्योरेंस क्लेम फाइल करते हैं और वह रिजेक्ट हो जाता है। आपके जानने वालों या फिर कभी न कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा। इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के बाद अक्सर पॉलिसी होल्डर को समझ नहीं आता कि उसका क्लेम आखिर क्यों रिजेक्ट हुआ। लेकिन अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें तो हो सकता है कि आपका इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट न हो। आइए इन विशेष बिन्दुओं पर एक नजर डालते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
वैलिड डाक्यूमेंट्स: ज्यादातर इंश्योरेंस क्लेम इसलिए भी रिजेक्ट हो जाते हैं क्योंकि उनके लिए सबमिट किये गए डॉक्यूमेंट या तो गलत होते हैं या फिर स्पष्ट नहीं होते। इसीलिए इंश्योरेंस क्लेम करते हुए उचित डॉक्यूमेंट जरूर फाइल करें।
पॉलिसी सही से पढ़ें: अक्सर हमारा क्लेम इसलिए भी रिजेक्ट हो जाता है क्योंकि हमें ये नहीं पता होता है कि हमारी पॉलिसी में क्या शामिल है और क्या हमारी पॉलिसी में शामिल नहीं है। इसीलिए क्लेम फाइल करने से पहले एक बार पॉलिसी को अच्छी तरह से पढ़ जरूर लें।
सही समय: सभी कंपनियां अपने यूजर्स को स्पष्ट रूप से बताती हैं कि उन्हें एक्सीडेंट की स्थिति में कितने घंटों के भीतर कंपनी को एक्सीडेंट के बारे में बताना है। अगर आप उतने घंटों के भीतर कंपनी को एक्सीडेंट के बारे में नहीं बताते हैं तो इससे आपका क्लेम तो रिजेक्ट नहीं होगा लेकिन हो सकता है कि बाद में कार में कुछ ऐसा खराब हो जाए जो आपकी पॉलिसी में कवर न होता हो और इसकी वजह से बाद में आपका क्लेम भी रिजेक्ट हो सकता है।
चोरी के मामले में: अगर आपकी कार चोरी हो जाए तो इस मामले में जल्द से जल्द FIR फाइल कर दें। क्योंकि अगर बाद में आप कार की चोरी के लिए क्लेम फाइल करते हैं तो इसके लिए भी आपको FIR की जरूरत पड़ेगी।
अपने नाम पर करवा लें कार की पॉलिसी: अगर आपकी कार की इंश्योरेंस पॉलिसी किसी और के नाम पर है तो भी आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी को अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लें।
