Indian Railways Child Ticket Rules 2026: भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से ट्रेन (Train) में बच्चों के साथ यात्रा करने के नियम यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए किराया और आरक्षण से जुड़े नियमों को समझना जरूरी है, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। अगर आप भी ट्रेन से सफर करते हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए काम का साबित हो सकता है-
कौन कर सकता है मुफ्त में सफर
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यात्रा पूरी तरह मुफ्त होती है। यानी ऐसे बच्चों के लिए कोई टिकट नहीं लिया जाता। हालांकि, भारतीय रेलवे यह जरूर कहता है कि यात्री रिजर्वेशन करवाते समय फॉर्म में अपने साथ यात्रा करने वाले 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नाम जरूर दर्ज करें। इससे रेलवे को यह जानकारी रहती है कि कितने छोटे बच्चे यात्रा कर रहे हैं।

Train Travel Rules (Photo: iStock)
साथ ही, ट्रेन में यात्रा करते समय यात्रियों को अपने साथ मौजूद ऐसे बच्चों की जानकारी ट्रेन कंडक्टर या टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) को भी देनी होती है। टीटीई इस जानकारी को रिजर्वेशन चार्ट में दर्ज करता है। इसका फायदा यह होता है कि किसी आपात स्थिति में बच्चों की पहचान करना आसान हो जाता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
5 से 12 साल तक के बच्चों के नियम
अब बात करें 5 साल से 12 साल तक के बच्चों की तो इनके लिए किराया अलग तरीके से तय किया जाता है। अगर आप इस उम्र के बच्चे के लिए सीट या बर्थ (रिजर्व क्लास में) लेना चाहते हैं, तो आपको उसके लिए पूरा वयस्क (एडल्ट) किराया देना होगा। यानी सीट या बर्थ लेने पर बच्चे को एक अलग यात्री की तरह माना जाता है।
लेकिन अगर आप 5 से 12 साल के बच्चे के लिए अलग से सीट या बर्थ नहीं लेते, तो ऐसे में आपको केवल आधा किराया (हाफ फेयर) देना होता है। हालांकि यह किराया भी न्यूनतम दूरी के नियम के अनुसार ही लागू होता है।
इसके अलावा, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आरक्षण शुल्क, अतिरिक्त शुल्क (सप्लीमेंट्री चार्ज) और डेवलपमेंट सरचार्ज जैसे चार्ज अलग से लागू किए जाते हैं। यानी किराए के अलावा ये अतिरिक्त शुल्क भी आपको देने होते हैं, खासकर जब आप सीट या बर्थ बुक करते हैं।
12 साल से अधिक के बच्चों के नियम
12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भारतीय रेल में पूर्ण रूप से वयस्क (Adult) माना जाता है। यानी उनके लिए टिकट, किराया और सीट/बर्थ से जुड़े सभी नियम वयस्क यात्रियों जैसे ही लागू होते हैं। ऐसे यात्रियों के लिए पूरा किराया देना अनिवार्य होता है और उन्हें अलग से सीट या बर्थ भी दी जाती है। इस उम्र के बच्चों का नाम और विवरण भी टिकट में सही तरीके से दर्ज होना चाहिए, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की समस्या न हो। साथ ही, पहचान और सुरक्षा के लिहाज से भी यह जरूरी है कि उनकी जानकारी सही हो।
