Rs 2000 Notes Withdrawal: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 2000 रुपये के बैंक नोट को चलन से हटाने का प्रभाव दिखने लगा है। आंकड़ों के अनुसार, नौ फरवरी को समाप्त सप्ताह में चलन में करेंसी की बढ़ोतरी एक साल पहले के 8.2 फीसदी से घटकर 3.7 फीसदी रह गई है। करेंसी इन सर्कुलेशन (CIC) यानी प्रचलन में मौजूद नोटों और सिक्के। वहीं, जनता के पास मौजूद मुद्रा से तात्पर्य बैंकों के पास जमा नकदी को घटाकर प्रचलन में मौजूदा नोटों और सिक्कों से होता है।
कमर्शियल बैंकों के डिपॉजिट में इजाफा
आरबीआई के अनुसार, कमर्शियल बैंकों के पास जमा में जनवरी में दो अंक में बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह भी 2,000 के नोटों को हटाना है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, रिजर्व करेंसी (RM) की बढ़ोतरी नौ फरवरी, 2024 को घटकर 5.8 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 11.2 प्रतिशत थी। आरएम में CIC के अलावा आरबीआई के पास बैंकों की जमा राशि और केंद्रीय बैंक के पास अन्य जमा शामिल हैं।
करेंसी सर्कुलेशन का आंकड़ा
आरबीआई के अनुसार, आरएम के सबसे बड़े खंड CIC की वृद्धि एक साल पहले के 8.2 फीसदी से घटकर 3.7 प्रतिशत रह गई। इसकी वजह स्पष्ट रूप से 2,000 रुपये के बैंक नोटों को वापस लेना है। केंद्रीय बैंक ने 19 मई, 2023 को 2,000 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी।
31 जनवरी तक, 2,000 रुपये के लगभग 97.5 प्रतिशत नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गए थे, और केवल 8,897 करोड़ रुपये मूल्य के ऐसे नोट अब भी जनता के पास हैं। 19 मई, 2023 को कारोबार की समाप्ति पर चलन में 2,000 रुपये के बैंक नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था।
2000 रुपये के नोट को बदलने की डेडलाइन
ऐसे नोट रखने वाली जनता और यूनिट्स को शुरू में 30 सितंबर, 2023 तक इन्हें बदलने या बैंक खातों में जमा करने के लिए कहा गया था। बाद में इस डेडलाइन को सात अक्टूबर, 2023 तक बढ़ा दिया गया था। आठ अक्टूबर, 2023 से लोगों को आरबीआई के 19 कार्यालयों में करेंसी बदलने या उनके बैंक खातों में उतनी ही राशि जमा करने का विकल्प प्रदान किया गया है। नवंबर, 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद 2,000 का नोट लाया गया था।
