जंतर-मंतर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले दिल्ली की तस्वीर आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सिर्फ एक नहीं, बल्कि पांच ऐतिहासिक जंतर-मंतर हैं? इनमें से हर एक को सैकड़ों साल पहले आसमान, ग्रह-नक्षत्र, समय और मौसम की सटीक जानकारी हासिल करने के लिए बनाया गया था।
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उस दौर में न कंप्यूटर थे, न सैटेलाइट और न ही डिजिटल घड़ियां। फिर भी पत्थरों और ज्यामितीय संरचनाओं की मदद से ऐसी वेधशालाएं तैयार की गईं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। खास बात यह है कि इन जंतर-मंतरों की बनावट एक जैसी नहीं है। हर शहर की वेधशाला वहां की जरूरत, स्थान और वैज्ञानिक सोच के अनुसार बनाई गई थी। अगर आपको इतिहास, विज्ञान और यात्रा—तीनों में दिलचस्पी है, तो ये जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
जंतर-मंतर आखिर क्या है
जंतर-मंतर एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला (Astronomical Observatory) है। यहां बड़े-बड़े पत्थर और विशेष आकार के यंत्र बनाए गए थे, जिनकी मदद से समय, सूर्य की स्थिति, ग्रहों की चाल और मौसम से जुड़ी जानकारी निकाली जाती थी। इन्हें 18वीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था।
1. जयपुर का जंतर-मंतर – सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध
अगर सभी जंतर-मंतरों में किसी का नाम सबसे पहले लिया जाता है, तो वह जयपुर का जंतर-मंतर है। यह सबसे बड़ा और सबसे अच्छी तरह संरक्षित परिसर है। यहां दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य घड़ी सम्राट यंत्र भी मौजूद है। यही वजह है कि इसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है।
2. दिल्ली का जंतर-मंतर – राजधानी का वैज्ञानिक इतिहास
दिल्ली का जंतर-मंतर सबसे चर्चित है क्योंकि यह देश की राजधानी में स्थित है। इसे भी महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था। आज यह इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
3. उज्जैन का जंतर-मंतर – खगोल विज्ञान का खास केंद्र
प्राचीन समय में उज्जैन को भारतीय खगोल विज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। इसी वजह से यहां भी जंतर-मंतर बनाया गया। ग्रह-नक्षत्रों की गणना के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता था।
4. वाराणसी का जंतर-मंतर – ज्ञान और विज्ञान का संगम
वाराणसी हमेशा से शिक्षा और विद्या का केंद्र रहा है। यहां का जंतर-मंतर गंगा किनारे स्थित मान महल परिसर में बनाया गया था। यह दिखाता है कि उस दौर में धार्मिक नगरी में भी विज्ञान को कितना महत्व दिया जाता था।
5. मथुरा का जंतर-मंतर – इतिहास में दर्ज, आज लगभग लुप्त
बहुत कम लोग जानते हैं कि मथुरा में भी जंतर-मंतर बनाया गया था। हालांकि समय के साथ इसका अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया और अब यह अपने मूल स्वरूप में मौजूद नहीं है। फिर भी इतिहास में इसका उल्लेख मिलता है और यह पांच वेधशालाओं में गिना जाता है।
घूमने जाएं तो क्या देखें?
अगर आप जयपुर जाएं तो सम्राट यंत्र और अन्य विशाल उपकरण जरूर देखें। दिल्ली में अलग-अलग यंत्रों की बनावट समझें। वाराणसी में जंतर-मंतर के साथ गंगा घाटों का अनुभव लें, जबकि उज्जैन में महाकाल मंदिर के साथ इस ऐतिहासिक वेधशाला को भी अपनी यात्रा का हिस्सा बनाएं।
