Hydrogen train: घुमक्कड़ लोगों के लिए खुशखबरी है। भारतीय रेलवे इतिहास रचने जा रहा है। दिसंबर में, अपनी पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन के परीक्षण के साथ ही इंडियन रेलवे का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो जाएगा। हरियाणा में जिंद-सोनीपत मार्ग पर 140 किमी/घंटा की गति से 90 किलोमीटर की दूरी ये ट्रेन तय करेंगी।
हाइड्रोजन ट्रेन के फायदों पर एक नजर-
डीजल इंजन की तुलना में 60% कम शोर के साथ यात्री शांत यात्रा का लुत्फ उठा सकते हैं।
हवा को प्रदूषित करने वाला कोई कार्बन डाइऑक्साइड या नाइट्रोजन ऑक्साइड वातावरण में नहीं फैलता।
प्रत्येक हाइड्रोजन टैंक ट्रेन को 1,000 किलोमीटर तक शक्ति प्रदान करता है।
साल 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर इसे एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। मालूम हो कि हाइड्रोजन ट्रेनें ईंधन कोशिकाओं द्वारा संचालित होती हैं जो बिजली उत्पन्न करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को जोड़ती हैं। इससे कोई प्रदूषण नहीं होता केवल पानी और भाप ही इसके कारक हैं।
बता दें कि ये ट्रेन तमिलनाडु के पेरम्बूर में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा निर्मित हो रही हैं जो एक नए युग का प्रतीक हैं। यदि दिसंबर का परीक्षण सफल होता है, तो रेलवे नेटवर्क 2025 तक 35 और हाइड्रोजन-संचालित ट्रेनें शुरू करने की योजना बना रहा है। जर्मनी, स्वीडन और चीन जैसे देश पहले ही हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को अपना चुके हैं।
