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'आत्मघाती हमला था लाल किला ब्लास्ट, उमर नबी ने किया था IED एक्टिवेट'; NIA ने चार्जशीट में किए बड़े खुलासे

NIA के मुताबिक बरामद सामग्री में TATP और रिमोट-कंट्रोल से विस्फोट करने के तरीकों से जुड़ी जानकारी थी। इसके अलावा लड़ाकू तकनीक, निगरानी, बच निकलने और गुप्त तरीके से गतिविधियां संचालित करने से संबंधित बातें भी इसमें थीं।

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लाल किला ब्लास्ट मामले में बड़े खुलासे। (फोटो: canva)

लाल किला ब्लास्ट मामले में एनआईए ने अपनी चार्जशीट में बड़े खुलासे किए हैं। इसमें एनआईए ने दावा किया है कि लाल किला ब्लास्ट आत्मघाती बम धमाका था। आरोपी उमर उन नबी (A-1) धमाके के वक्त कार के अंदर मौजूद था। चार्जशीट में कहा गया है कि उमर नबी ने कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को एक्टिवेट किया।

आरोपी ‘लोन मुजाहिद’ की प्लेबुक फॉलो कर रहे थे

चार्जशीट के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin नाम की सामग्री से प्रभावित थे। NIA के अनुसार यह AQAP से जुड़ा एक मैनुअल है, जिसमें विस्फोटक, हथियार, गुप्त गतिविधियों और IED से संबंधित ऑपरेशनल जानकारी दी गई थी।

दस्तावेज में TATP और रिमोट डिटोनेशन की जानकारी

NIA के मुताबिक बरामद सामग्री में TATP और रिमोट-कंट्रोल से विस्फोट करने के तरीकों से जुड़ी जानकारी थी। इसके अलावा लड़ाकू तकनीक, निगरानी, बच निकलने और गुप्त तरीके से गतिविधियां संचालित करने से संबंधित बातें भी इसमें थीं।

‘सशस्त्र संघर्ष’ को धार्मिक कर्तव्य बताने वाला प्रचार साहित्य

NIA की चार्जशीट में ऐसे प्रचार दस्तावेजों का भी जिक्र है, जिनमें लगातार सशस्त्र संघर्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को हिंसा के जरिए खत्म करने की वकालत की गई थी। दस्तावेज में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को कथित तौर पर ‘शैतानी और तानाशाही व्यवस्था’ बताते हुए उन्हें जिहाद के जरिए खत्म करने की बात कही गई।

‘मुसलमान जिहाद के बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकते’

चार्जशीट के अनुसार प्रचार सामग्री में यह विचार रखा गया कि मुसलमान जिहाद के बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकते। इस तरह सशस्त्र संघर्ष को व्यक्तिगत पसंद के बजाय धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश किया गया।

गजवा-ए-हिंद के नाम पर हिंसा का समर्थन

NIA के मुताबिक दस्तावेजों में इस्लाम के नाम पर हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की गई। इनमें गजवा-ए-हिंद का जिक्र और इराक, अफगानिस्तान तथा अमेरिका में हुए विद्रोहों की प्रशंसा का भी उल्लेख है।

आतंकी हमले के लिए ‘ऑपरेशनल सिक्योरिटी’ के निर्देश

चार्जशीट के अनुसार बरामद सामग्री सिर्फ वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थी। इसमें पहचान छिपाने, गुप्त तरीके से घुसपैठ करने और जांच एजेंसियों से बचने के लिए कई फर्जी पहचान इस्तेमाल करने जैसी तकनीकों का उल्लेख था।

लोन-वुल्फ और फिदायीन हमलों की रणनीति का जिक्र

NIA ने बताया कि दस्तावेजों में अकेले हमलावरों द्वारा हमले, घात लगाकर लक्षित हमले और शाहदाह/फिदायीन यानी आत्मघाती हमलों से संबंधित निर्देश भी मौजूद थे।

लाल किले की करीब दो साल तक रेकी

चार्जशीट के मुताबिक यह हमला अचानक तैयार की गई योजना नहीं था। लाल किले की रेकी दिसंबर 2023 से ही किए जाने के सबूत मिले हैं। आरोपी उमर उन नबी ने दूसरे आरोपियों के साथ कई बार लाल किले और उसके आसपास के इलाके का जायजा लिया।

दिसंबर 2023 से शुरू हुई थी टारगेट की निगरानी

NIA की चार्जशीट में लाल किले की कई रेकी विजिट का जिक्र है। जांच एजेंसी के मुताबिक निगरानी करीब दो साल तक चली और इस दौरान आरोपी हमले के लिए संभावित जगह और परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रहे थे।

तय तारीख पर नहीं, गिरफ्तारी के डर से जल्द किया गया धमाका

NIA के मुताबिक ब्लास्ट किसी पहले से तय तारीख पर करने की योजना नहीं थी। श्रीनगर में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उमर उन नबी को भी पकड़े जाने का डर था। इसी घबराहट में उसने हमले को जल्द अंजाम दिया।

अल-फलाह फ्लैट से मिले हस्तलिखित नोट्स में हमले का मकसद

NIA की चार्जशीट के मुताबिक अल-फलाह फ्लैट से कुछ हस्तलिखित नोट्स बरामद हुए। इन नोट्स से कथित तौर पर आरोपियों की विचारधारा और हमले के पीछे के मकसद पर महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

नोट्स में लोकतंत्र को खारिज करने और शरिया लागू करने की बात

चार्जशीट के अनुसार बरामद हस्तलिखित नोट्स में लोकतांत्रिक व्यवस्था को खारिज करने और शरिया कानून लागू करने की मांग से जुड़े विचार लिखे थे।

लाल किले को ‘भारतीय राज्य का प्रतीक’ मानकर बनाया निशाना

NIA की चार्जशीट के मुताबिक लाल किले को सिर्फ एक भीड़भाड़ वाली जगह के तौर पर नहीं चुना गया था। इसे कथित तौर पर ‘भारतीय राज्य के प्रतीक’ के रूप में देखा गया और इसी वजह से इसे हमले का निशाना बनाया गया।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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