Kerala Tourism 2025: समुद्र की लहरों से लेकर हरे-भरे पहाड़ों तक, बैकवॉटर की शांति से लेकर मसालों की खुशबू तक 2025 में केरल ने पर्यटन की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। इस साल राज्य ने 2.58 करोड़ से अधिक पर्यटकों का स्वागत किया, जो इसके गठन के बाद अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह उपलब्धि न केवल संख्या में बड़ी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि केरल अब देश के सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद ट्रैवल डेस्टिनेशनों में शामिल हो चुका है।
राज्य के पर्यटन मंत्री P. A. Mohamed Riyas ने कोझिकोड में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि 2025 में कुल 2,58,80,365 पर्यटक राज्य पहुंचे। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 29 लाख अधिक हैं। घरेलू पर्यटकों की संख्या में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत देती है कि देश के भीतर भी केरल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचे। यह आंकड़ा बताता है कि केरल अब सिर्फ दक्षिण भारत का आकर्षण नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैवलर्स का फेवरेट बन चुका है।
इडुक्की बना टूरिस्ट्स का नया फेवरेट
इस साल इदुक्की जिला पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरा, जहां 46.79 लाख से अधिक लोगों ने दस्तक दी। हरी-भरी पहाड़ियां, चाय बागान और शांत झीलें यहां की पहचान हैं। इसके बाद एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। विदेशी पर्यटकों के बीच एर्नाकुलम खासा लोकप्रिय रहा।
क्यों बढ़ा केरल का आकर्षण?
इस सफलता के पीछे कई कारण हैं। सरकार द्वारा विश्राम गृहों का आधुनिकीकरण और सुविधाओं का विस्तार यात्रियों को बेहतर अनुभव दे रहा है। कोविड-19 के बाद पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए बनाई गई योजनाएं अब रंग ला रही हैं। केरल की प्राकृतिक सुंदरता तो पहले से ही दुनिया भर में मशहूर है। बैकवॉटर क्रूज, जंगल सफारी और आयुर्वेदिक वेलनेस टूर जैसे अनुभव पर्यटकों को बार-बार यहां खींच लाते हैं। इसके अलावा, स्थानीय स्वाद जैसे मालाबार परोटा और फिश करी सैलानियों की यात्रा को और यादगार बना देते हैं।
हर उम्र के लिए कुछ खास
मुन्नार, वायनाड और वारकेला जैसे स्थानों ने भी इस रिकॉर्ड सफलता में अहम भूमिका निभाई। रोमांच चाहने वालों से लेकर सुकून की तलाश में आए यात्रियों तक हर किसी के लिए यहां कुछ न कुछ खास है।
पर्यटन का स्थायी मॉडल
2025 का यह आंकड़ा सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करता है। संख्या के साथ-साथ गुणवत्ता, विविधता और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार ने केरल को एक स्थायी और जिम्मेदार पर्यटन मॉडल की ओर अग्रसर किया है। स्पष्ट है कि केरल की यह सफलता राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ आने वाले वर्षों में पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगी। देवदार, नारियल और नीले पानी के बीच बसा यह राज्य अब सिर्फ एक डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि एक अनुभव बन चुका है।
