Haunted Travel Destinations: घूमने-फिरने के लिए अगर आप किसी यूनीक ट्रैवल डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो ये जगह आपको पूरी तरह से रोमांच से भर देगी। धनुषकोडी एक छोटा सा बंदरगाह शहर था, जो 1964 में आए एक भयानक चक्रवात में पूरी तरह तबाह हो गया। इस तूफान में 800 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और पूरा शहर लगभग समुद्र में समा गया। आज ये जगह एक घोस्ट टाउन के रूप में जानी जाती है, जहां सिर्फ खंडहर और सन्नाटा बचा है। ये जगह बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के मिलन बिंदु पर स्थित है और श्रीलंका के काफी करीब है। साफ मौसम में यहां से श्रीलंका का किनारा भी दिखाई दे जाता है।
1964 का वो तूफान इतना खतरनाक था कि हवा की रफ्तार करीब 270 किमी/घंटा तक पहुंच गई थी और समुद्र में 20 फीट ऊंची लहरें उठीं। इसने पूरे शहर को तबाह कर दिया। हजारों लोग फंस गए थे और शहर का संपर्क पूरी तरह टूट गया, खासकर जब Pamban Bridge भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
आज धनुषकोडी में ज्यादा कुछ देखने को नहीं है, क्योंकि यहां डेवलपमेंट बहुत कम है। लेकिन जो लोग यहां आते हैं, वो पुराने रेलवे स्टेशन और टूटी-फूटी इमारतों के खंडहर देखने जरूर जाते हैं। जो इस बात की याद दिलाते हैं कि कभी ये जगह काफी रौनकभरी हुआ करती थी।
इस जगह की एक और खास बात है कि ये रामसेतू के पास स्थित है, जिसे Adam’s Bridge भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने यहीं से श्रीलंका तक पुल बनवाया था। हालांकि, आज ये शहर वीरान है, लेकिन पास का रामेश्वरम टूरिस्ट्स के लिए काफी एक्टिव है। वहां से लोग हस्तशिल्प, रेशमी साड़ियां और लोकल चीजें खरीद सकते हैं।
धनुषकोडी जाने वाला रास्ता बहुत ही एकांत और दोनों तरफ समुद्र से घिरा हुआ है। पर्यटकों को शाम ढलने के बाद यहां रुकने की अनुमति नहीं है। बता दें कि इस जगह से जुड़ी कई अधूरी कहानियां भी हैं जो लोगों के दिलों में घर कर गई हैं। कई सैलानी यहां अजीब सी शांति और भारीपन महसूस करने का दावा करते हैं, जो उस रात की भयावहता की याद दिलाता है।
