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परिवार संग करें Rann Utsav का अनोखा अनुभव, जहां हर रेत का कण कहता है कहानी

Rann Utsav 2025: 23 अक्टूबर 2025 से 4 मार्च 2026 तक रण उत्सव चलेगा। रण उत्सव कच्छ के महान रण को संस्कृति, कला और रंगों के जीवंत मेले में बदल देता है। अगर आप परिवार के साथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यहां कच्छ क्षेत्र में 5 स्थान हैं जो आपके बच्चों को बेहद पसंद आएगी। ये स्थान ना केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बच्चों के लिए मनोरंजक और शैक्षिक अनुभव भी प्रदान करते हैं।

Rann Utsav 2025

Rann Utsav 2025

Rann Utsav 2025: रण उत्सव 2025 गुजरात के कच्छ क्षेत्र में आयोजित एक अनूठा महोत्सव है, जो हर साल सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है। यह उत्सव कच्छ के महान रण को एक जीवंत रेगिस्तानी मेले में बदल देता है, जहां संस्कृति, कारीगरी और रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस वर्ष यह महोत्सव 23 अक्टूबर से 4 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। यदि आप अपने बच्चों के साथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो रण के आसपास कई ऐसे स्थान हैं जो पूरे परिवार के लिए उपयुक्त हैं।

भुज: कच्छ की सांस्कृतिक धड़कन (85 किमी दूर)

भुज कच्छ का सांस्कृतिक केंद्र है, जो 2001 के विनाशकारी भूकंप के बाद फिर से नई ऊर्जा के साथ खड़ा हुआ है। यहाँ स्थित ऐना महल अपने शानदार दर्पणों और नीले-सफेद टाइलों के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान बच्चों के लिए इतिहास का एक जीवंत पाठशाला जैसा अनुभव प्रदान करता है।

मंडवी बीच: जहां रेगिस्तान और समुद्र मिलते हैं (150 किमी दूर)

मंडवी का सुनहरा समुद्र तट बच्चों के लिए एक आदर्श गंतव्य है। यहाँ आप ऊँट की सवारी, पतंगबाजी और समुद्र तट पर पिकनिक का आनंद ले सकते हैं। विजय विलास पैलेस की छत से अरब सागर का मनोरम दृश्य अविस्मरणीय है।

काला डुंगर: कच्छ का चुम्बकीय पर्वत (45 किमी दूर)

काला डुंगर कच्छ का सबसे ऊँचा बिंदु है, जहाँ से रण का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यहाँ स्थित दत्तात्रेय मंदिर में हर शाम विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है, जो बच्चों के लिए एक रोचक अनुभव बन सकता है।

निरोना गांव: जहां कला जीवित है (90 किमी दूर)

निरोना कच्छ के सबसे रचनात्मक गाँवों में से एक है। यहां बच्चे स्थानीय कारीगरों को पारंपरिक कला-कौशल का प्रदर्शन करते देख सकते हैं। विशेष रूप से प्रसिद्ध रोगन कला और अन्य हस्तशिल्प बच्चों में सृजनशीलता की प्रेरणा जगाते हैं।

धोलावीरा: प्राचीन नगर का अद्भुत अनुभव

धोलावीरा, जो अब यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है, प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा रहा है। यहाँ के तीन भाग – सिटाडेल, मध्य नगर और निचला नगर – बच्चों को प्राचीन भारतीय नगरों की वास्तुकला और जीवनशैली से परिचित कराते हैं।

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प्रभात शर्मा
प्रभात शर्मा Author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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