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कंप्यूटर में होने वाली गड़बड़ी को 'Bug' क्यों कहा जाता है? जानें कहां से हुई इसकी शुरुआत

अगर आप कंप्यूटर या फिर लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं तो आपने जरूर 'बग' शब्द के बारे में सुना होगा। क्या आपको मालूम है कि आखिर इसे बग ही क्यों कहा जाता है? आइए आपको बताते हैं कि इसकी शुरुआत कहां से हुई है।

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टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब बग शब्द आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

अगर आप कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर के बारे में थोड़ी भी जानकारी रखते हैं, तो आपने "बग" शब्द को आपने जरूर सुना होगा। जब किसी सॉफ्टवेयर, ऐप या कंप्यूटर सिस्टम में कोई तकनीकी गड़बड़ी या खराबी आ जाती है, तो अक्सर उसे बग कहा जाता है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि तकनीकी दुनिया में इस समस्या के लिए "बग" जैसा शब्द क्यों इस्तेमाल किया जाता है? आखिर इसे सिर्फ त्रुटि, खराबी या ग्लिच क्यों नहीं कहा जाता?

इस सवाल का जवाब इतिहास में छिपा है। "बग" शब्द आज भले ही कंप्यूटर की समस्याओं के लिए आम बोलचाल के लिए इस्तेमाल होता हो, लेकिन इसकी कहानी कई दशक पुरानी है। समय के साथ यह शब्द तकनीकी क्षेत्र का एक अहम हिस्सा बन गया और आज दुनिया भर के प्रोग्रामर और इंजीनियर किसी भी सॉफ्टवेयर की खामी को "बग" ही कहते हैं। आइए जानते हैं कि इस शब्द की शुरुआत कैसे हुई और यह तकनीक की दुनिया में इतना लोकप्रिय क्यों बन गया।

कैसे हुई बग शब्द की शुरुआत?

कई ऐतिहासिक जानकारियों के अनुसार, "बग" शब्द का संबंध 1878 में मशहूर आविष्कारक Thomas Edison से जुड़ा माना जाता है। बताया जाता है कि उन्होंने उसी वर्ष Theodore Puskas को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में एडिशन ने अपने आविष्कारों पर काम करते समय आने वाली टेक्निकल समस्याओं और रुकावटों को "बग्स" कहा था।

यहीं से इस शब्द का तकनीकी दुनिया में इस्तेमाल शुरू हुआ। बाद के वर्षों में, खासकर 19वीं और 20वीं सदी के दौरान, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ विभिन्न मशीनों और उपकरणों में आने वाली गड़बड़ियों के लिए "बग" शब्द का उपयोग करने लगे। उदाहरण के तौर पर, जब टेलीफोन लाइनों में शोर या किसी तरह की तकनीकी समस्या आती थी, तो इंजीनियर अक्सर उसे सिस्टम में मौजूद "बग" बताते थे। धीरे-धीरे यही शब्द कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर की दुनिया में भी लोकप्रिय हो गया और आज किसी भी तकनीकी खामी को "बग" कहा जाता है।

Grace Hopper को भी मिला 'बग'

9 सितंबर 1947 को Grace Hopper अपनी टीम के साथ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंप्यूटर पर काम कर रही थीं, जिसका नाम Mark II Aiken Relay Calculator था। इसी दौरान मशीन में लगातार तकनीकी खराबियां और एरर आने लगे। इन समस्याओं की जांच की जिम्मेदारी ग्रेस हॉपर और उनकी टीम को दी गई। वे यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि मशीन ठीक से काम क्यों नहीं कर रही है और उसमें रुकावट किस वजह से आ रही है। जांच के दौरान टीम को पता चला कि मशीन के अंदर एक कीट (insect) फंस गया था, जिसकी वजह से सिस्टम में शॉर्ट सर्किट हो रहा था और मशीन ठीक से काम नहीं कर रही थी।

काफी कोशिशों के बाद उस कीट को सावधानी से बाहर निकाला गया। इस पूरी घटना को टीम ने अपनी लॉगबुक में रिकॉर्ड किया। उसमें यह भी लिखा गया कि यह पहली बार था जब सच में एक “बग” (कीट) मिलने की वजह से मशीन में खराबी आई थी।

यही घटना बाद में इतिहास में बहुत प्रसिद्ध हो गई और इसे कंप्यूटर की दुनिया में “बग” शब्द के इस्तेमाल से जोड़ा जाने लगा। इसके बाद से जब भी किसी कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर सिस्टम में कोई गलती या तकनीकी समस्या आती है, तो उसे बग कहा जाने लगा। और इस तरह की गड़बड़ी को ढूंढकर ठीक करने की प्रक्रिया को “डिबगिंग” कहा जाता है।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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