जोहो (Zoho) के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीधर वेम्बू ने हाल ही में वैश्विक तकनीकी और आर्थिक परिदृश्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि पारंपरिक वैश्वीकरण (Globalization) अब लगभग समाप्त हो चुका है और भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा व आर्थिक संप्रभुता बनाए रखने के लिए चीन की रणनीति से सीख लेने की सख्त आवश्यकता है।
वेम्बू का मानना है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और विशाल भाषा मॉडल (LLMs) के तेज़ी से होते विकास ने वैश्विक मामलों में चीन के कद और स्थिति को काफी मजबूत किया है। चीन ने पश्चिमी देशों की तकनीकों पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय अपनी घरेलू तकनीकी क्षमताओं और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम को विकसित करने पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया, जिसका फायदा उसे आज मिल रहा है।
चीन के बारे में वेम्बू ने क्या कहा?
उन्होंने ओपनएआई (OpenAI) और अमेरिका के तकनीकी प्रभुत्व का हवाला देते हुए आगाह किया कि अगर भारत केवल विदेशी एआई मॉडल और सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहता है, तो यह देश की दीर्घकालिक डिजिटल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। वेम्बू के अनुसार, चीन ने खुद को एक ऐसे मुकाम पर खड़ा कर लिया है जहां वह तकनीक के हस्तांतरण (Technology Transfer) के लिए किसी दूसरे देश का मोहताज नहीं है।
भारत के लिए सीख
यही सबक भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि देश केवल विदेशी तकनीकों के उपभोक्ता बनने तक सीमित न रहे। भारत को स्वदेशी एआई अनुसंधान, डेटा संप्रभुता और हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का निर्माण खुद करना होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई के इस नए दौर में जो देश तकनीक का मालिक होगा, वही वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति को दिशा देगा। इसलिए, भारत को अपनी नीतियां इस तरह ढालनी होंगी कि देश में मजबूत घरेलू टेक दिग्गजों का निर्माण हो सके, ताकि भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक संकट या पाबंदी की स्थिति में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर और सुरक्षित बना रहे।
