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नकली QR Code से यूजर्स की पर्सनल जानकारी चुरा रहे स्कैमर्स, अमेरिकी एक्सपर्ट की चेतावनी

QR code Scam: इस साल की तीसरी तिमाही में "क्यूआर कोड हमलों के 60,000 से अधिक मामले मिले है। स्कैम का सबसे लेटेस्ट मामलों में पेरोल और डाक स्कैम शामिल हैं। एक स्कैमर्स का क्यूआर कोड आपको एक नकली साइट पर ले जा सकता है जो वास्तविक दिखती है लेकिन असली नहीं है।

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QR code Scam

Photo : iStock

QR code Scam: अमेरिकी संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) ने चेतावनी जारी कि है कि स्कैमर्स लोगों की जानकारी चुराने के लिए नकली क्यूआर कोड का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में जनता को स्कैनिंग के लोगों को सचेत रहने को कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कैमर्स पार्किंग मीटरों पर क्यूआर कोड को अपने स्वयं के क्यूआर कोड से ढक देते हैं।

ऐसे होता है पूरा स्कैम

एफटीसी ने अपनी चेतावनी में कहा कि स्कैमर्स पार्किंग मीटरों के असली क्यूआर कोड को नकली से बदल देते हैं और कुछ चालाक स्कैमर आपको टेक्स्ट संदेश या ईमेल द्वारा एक क्यूआर कोड भेज सकते हैं और आपके लिए इसे स्कैन करने का कारण बना सकते हैं।

इसके बाद स्कैम शुरू होता है। स्कैमर्स यूजर्स को धोखा देने की कोशिश करते हैं। वे झूठ बोलते हैं और कहते हैं कि वे आपका पैकेज वितरित नहीं कर सके और आपको रीशेड्यूल करने के लिए उनसे संपर्क करना होगा। एफटीसी ने अपनी चेतावनी में कहा कि वे ऐसा दिखावा करते हैं, जैसे आपके अकाउंट में कोई समस्या है और आपको अपनी जानकारी की पुष्टि करने की आवश्यकता है।

स्कैमर्स यह भी कहेंगे कि उन्होंने आपके अकाउंट पर संदिग्ध गतिविधि देखी है और आपको अपना पासवर्ड बदलने की जरूरत है। एफटीसी ने चेतावनी दी कि ये सब झूठ हैं जो वे आपसे इमरजेंसी दिखाने के लिए ऐसा करने के लिए कहते हैं। वे चाहते हैं कि आप क्यूआर कोड को स्कैन करें और बिना सोचे-समझे यूआरएल ओपन कर लें।

QR Code स्कैम के एक साल में 60,000 से अधिक मामले

साइबर सुरक्षा कंपनी ट्रेलिक्स में खतरे की खुफिया जानकारी के प्रमुख जॉन फोकर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उन्हें इस साल की तीसरी तिमाही में "क्यूआर कोड हमलों के 60,000 से अधिक मामले मिले है। स्कैम का सबसे लेटेस्ट मामलों में पेरोल और डाक स्कैम शामिल हैं। एक स्कैमर्स का क्यूआर कोड आपको एक नकली साइट पर ले जा सकता है जो वास्तविक दिखती है लेकिन असली नहीं है।

पर्सनल जानकारी चुरा सकते हैं स्कैमर्स

एफटीसी ने कहा कि यदि आप नकली साइट पर लॉग इन करते हैं, तो स्कैमर्सआपके द्वारा दर्ज की गई कोई भी जानकारी चुरा सकते हैं। या क्यूआर कोड मैलवेयर इंस्टॉल कर सकता है जो आपकी जानकारी को समझने से पहले ही चुरा लेता है। एफटीसी के अनुसार, यदि आपको किसी अप्रत्याशित स्थान पर क्यूआर कोड दिखाई देता है, तो उसे खोलने से पहले यूआरएल को जरूर चेक करें।

ऐसे रहें सुरक्षित

एफटीसी सुझाव दिया है कि यदि यह एक यूआरएल जैसा दिखता है जिसे आप पहचानते हैं, तो सुनिश्चित करें कि यह नकली नहीं है। आप गलत वर्तनी या बदले हुए अक्षर की मदद से फेक यूआरएल को पहचान सकत हैं। किसी भी अनजारन ईमेल या टेक्स्ट मैसेज में क्यूआर कोड को स्कैन न करें। खासकर यदि यह आपको इमरजेंसी के नाम पर तुरंत पेमेंट करने के लिए कहना है। यदि आपको लगता है कि मैसेज वैध है, तो कंपनी से संपर्क करने के लिए उस फोन नंबर या वेबसाइट का उपयोग करें जिसके बारे में आप जानते हों कि वह वास्तविक है। क्‍यूआर कोड स्कैनिंग ऐप डाउनलोड न करें।

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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