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क्या iPhone है भारत का सबसे महंगा फोन? जवाब आपको चौंका देगा

लग-अलग देशों में iPhone की कीमतें स्थायी नहीं रहतीं। मुद्रा विनिमय दर, टैक्स नीतियों और आयात नियमों में बदलाव के कारण किसी भी देश की रैंकिंग समय के साथ बदल सकती है। ऐसे में जो बाजार आज सबसे सस्ता या सबसे महंगा है, वह भविष्य में अलग स्थिति में भी हो सकता है।

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Apple ने बढ़ाई कीमतें, शुरू किया नया लीज प्रोग्राम

अगर आपको लगता है कि भारत में Apple का नया iPhone सबसे महंगा बिकता है, तो ऐसा नहीं है। एक नई वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक iPhone 17 Pro (256GB) की सबसे ज्यादा कीमत तुर्किये में है, जबकि जापान इस फोन को खरीदने के लिए सबसे सस्ता बाजार साबित हुआ है। वहीं भारत इस सूची में काफी नीचे है और दुनिया का 23वां सबसे महंगा बाजार माना गया है।

तुर्किये में iPhone 17 Pro की कीमत सबसे ज्यादा

बिजनेस इनसाइट्स प्लेटफॉर्म Visual Capitalist और Deutsche Bank के आंकड़ों के अनुसार, तुर्किये में iPhone 17 Pro (256GB) की कीमत 2,592 डॉलर (करीब 2.25 लाख रुपये) है। यह अमेरिका की तुलना में लगभग 219% अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्किये में स्मार्टफोन्स पर लगने वाले विशेष उपभोग कर (Special Consumption Tax), डिवाइस रजिस्ट्रेशन शुल्क और 20% वैट (VAT) इसकी ऊंची कीमत की सबसे बड़ी वजह हैं।

भारत में कीमत ज्यादा, लेकिन दुनिया में 23वें स्थान पर

भारत में iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत 1,34,900 रुपये रखी गई है, जो अमेरिकी कीमत की तुलना में लगभग 121% अधिक है। इसके बावजूद भारत दुनिया का सबसे महंगा बाजार नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस सूची में 23वें स्थान पर है और कीमत के मामले में ब्रिटेन तथा कई यूरोपीय देशों से भी पीछे है।

इन देशों में भी काफी महंगा है iPhone

तुर्किये के बाद ब्राजील दूसरा सबसे महंगा बाजार है, जहां iPhone 17 Pro की कीमत 2,260 डॉलर है। इसके बाद मिस्र (Egypt) का स्थान आता है, जहां यह फोन 1,872 डॉलर में बिक रहा है। इन देशों में आयात शुल्क, टैक्स और स्थानीय नीतियों के कारण Apple डिवाइस की कीमत काफी बढ़ जाती है।

जापान में सबसे सस्ता मिल रहा iPhone 17 Pro

रिपोर्ट के मुताबिक, जापान iPhone 17 Pro खरीदने के लिए सबसे सस्ता बाजार है। यहां इसकी कीमत 1,121 डॉलर है, जो अमेरिका से भी थोड़ी कम है। इसकी प्रमुख वजह 10% का अपेक्षाकृत कम उपभोग कर (Consumption Tax), प्रतिस्पर्धी स्मार्टफोन बाजार और Apple की लंबे समय से अपनाई गई स्थानीय प्राइसिंग रणनीति मानी जा रही है। हालांकि हाल ही में येन की कमजोरी और विनिमय दर में बदलाव के चलते Apple ने जापान में कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं।

यूरोप में VAT का भी पड़ता है असर

रिपोर्ट बताती है कि सूची के मध्य हिस्से में ज्यादातर यूरोपीय देश शामिल हैं। इसकी वजह यह है कि वहां स्मार्टफोन की घोषित कीमतों में VAT (Value Added Tax) पहले से शामिल होता है। अलग-अलग देशों में VAT की दरें अलग होने के कारण iPhone की अंतिम कीमत में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

किन वजहों से बदलती है iPhone की कीमत?

Apple अलग-अलग देशों के लिए अपनी कीमत तय करता है, लेकिन अंतिम कीमत पर कई स्थानीय कारकों का असर पड़ता है। इनमें शामिल हैं:

  • आयात शुल्क
  • स्थानीय टैक्स और नियामकीय शुल्क
  • डिवाइस रजिस्ट्रेशन फीस
  • मुद्रा विनिमय दर
  • व्यापार नीतियां और टैरिफ
  • भू-राजनीतिक परिस्थितियां
  • मेमोरी चिप की वैश्विक कमी

रिपोर्ट के अनुसार, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के कारण DRAM चिप्स की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। Meta, Google और Microsoft जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं, जिससे स्मार्टफोन निर्माताओं की लागत भी बढ़ी है।

Apple ने बढ़ाई कीमतें, शुरू किया नया लीज प्रोग्राम

बढ़ती लागत के बीच Apple ने हाल ही में कई प्रमुख बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, में अपने Mac और iPad की कीमतों में 15% से 25% तक की बढ़ोतरी की है। इसके अलावा कंपनी ने अमेरिका में पहली बार Lease-to-Own प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिसके तहत ग्राहक करीब 17.99 डॉलर प्रति माह से iPhone और अन्य Apple डिवाइस लीज पर लेकर बाद में खरीद सकते हैं।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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