Artificial Intelligence: संस्थानों को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित समाधानों के इस्तेमाल को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यह बात शुक्रवार को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के ’डेटा इन्फॉर्मेटिक्स एंड इनोवेशन’ प्रभाग के उपमहानिदेशक रोहित भारद्वाज ने कही। उन्होंने ’एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि एआई-सक्षम तकनीकों को अपनाने से पहले उनका पूरी तरह से परीक्षण और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित समाधानों के इस्तेमाल को लेकर तब तक अत्यधिक उत्साह नहीं दिखाना चाहिए, जब तक उनका पूर्ण परीक्षण न हो और वे विश्वसनीय न हों।
एआई-सक्षम डेटा की तैयारी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारद्वाज ने कहा कि सरकारी विभागों को अपने आंकड़ों को कंप्यूटर द्वारा पढ़े जाने योग्य यानी ‘मशीन-रीडेबल’ प्रारूप में तैयार करना चाहिए। इसके लिए डेटा के साथ ‘कॉन्टेक्स्ट फाइल’, ‘सिमैंटिक्स’ और ‘मेटाडेटा’ शामिल होना जरूरी है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाया कि ‘कॉन्टेक्स्ट फाइल’ वह होती है जिसमें किसी जानकारी को सही ढंग से समझने के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि होती है। ‘सिमैंटिक्स’ का मतलब है डेटा और शब्दों के वास्तविक अर्थ और उनके सही संदर्भ को समझना। वहीं, ‘मेटाडेटा’ डेटा के बारे में अतिरिक्त जानकारी होती है, जैसे कि उसकी तारीख, स्रोत और संरचना। उन्हों ने जोर देकर कहा कि जानकारी को संरचित प्रारूप में संग्रहित किया जाए ताकि वे एआई-सक्षम बन सकें। इसका उद्देश्य यह है कि एआई आसानी से डेटा का विश्लेषण कर सके और परिणाम अधिक विश्वसनीय हों।
परीक्षण की जरूरत पर जोर
भारद्वाज ने कनाडा के एक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि एआई समान प्रॉम्प्ट दिए जाने पर भी किसी डेटा सेट का विश्लेषण कई तरह से कर सकता है। इसका मतलब यह है कि बिना परीक्षण किए एआई समाधान पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा, "जिन चीजों का अभी परीक्षण नहीं हुआ है, उनके लिए अत्यधिक उत्साह दिखाना सही नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को अपनाया जा सकता है, लेकिन इसका उपयोग तभी करना चाहिए जब यह विश्वसनीय हो।
डेटा का संरचित और सुरक्षित संग्रह
उपमहानिदेशक ने सुझाव दिया कि प्रत्येक मंत्रालय या सरकारी विभाग के पास अपने डेटा का एक सूची-पत्र या कैटलॉग होना चाहिए। इसके अलावा, सभी फाइलें केवल पीडीएफ में नहीं बल्कि मशीन-रीडेबल प्रारूप में उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उन्हें आसानी से एआई सिस्टम में इस्तेमाल किया जा सके। इस अवसर पर गूगल के प्रेम रामास्वामी ने भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी वैश्विक स्तर पर विभिन्न डेटा सेट को एक साझा ’नॉलेज ग्राफ’ में जोड़ने और उस पर डेटा सर्च इंजन स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इसका मकसद यह है कि डेटा तक तेज़ और सरल पहुंच संभव हो सके। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि डेटा का एक ही स्रोत पर केंद्रीकृत होना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसके बजाय, डेटा को प्रत्येक संगठन के पास स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रूप से रखा जाना चाहिए। ऐसा करने से डेटा व्यापारिक इकाइयों के लिए आसानी से उपलब्ध और किफायती बनेगा।
सारांश में, रोहित भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि एआई में अत्यधिक उत्साह दिखाने से पहले इसके परीक्षण और विश्वसनीयता पर ध्यान देना अनिवार्य है। साथ ही, उन्होंने एआई-सक्षम डेटा के लिए संरचित, मशीन-रीडेबल और सुरक्षित प्रारूप की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, उद्योग के विशेषज्ञों ने डेटा की स्थानीय सुरक्षा और साझा उपयोग के बीच संतुलन बनाए रखने का सुझाव दिया।
