Walkie-Talkie की बिक्री पर सरकार ने कसा शिकंजा, ई-कॉमर्स साइट पर 44 लाख का जुर्माना
- Authored by: Pradeep Pandey
- Updated Jan 17, 2026, 07:35 AM IST
Walkie Talkie: कई बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की बिक्री को लेकर भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने ऐसे वॉकी-टॉकी की ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा दिया, जो दूरसंचार और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करते हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
New Rule For Walkie Talkie/photo-canva
यदि आप भी पर्सनल वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है। सरकार ने वॉकी-टॉकी की बिक्री और रखने के नियमों को लेकर बड़ा बदलाव किया है। भारत की उपभोक्ता संरक्षण नियामक संस्था सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने Amazon, Flipkart, Meesho और Facebook Marketplace (Meta) सहित कई बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की बिक्री को लेकर भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने ऐसे वॉकी-टॉकी की ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा दिया, जो दूरसंचार और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करते हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
करीब 17 हजार अवैध लिस्टिंग पकड़ी गईं
यह कार्रवाई CCPA की स्वतः संज्ञान जांच के बाद हुई। जांच में सामने आया कि लगभग 17,000 वॉकी-टॉकी लिस्टिंग बिना अनिवार्य मंजूरी, सही फ्रीक्वेंसी जानकारी और लाइसेंस विवरण के ऑनलाइन बेची जा रही थीं। ये डिवाइस पर्सनल मोबाइल रेडियो (PMR) श्रेणी में आती हैं, जो कड़े नियमों के तहत नियंत्रित होती हैं।
किन प्लेटफॉर्म पर कितना जुर्माना
CCPA ने Meesho, Meta Platforms Inc. (Facebook Marketplace), Flipkart और Amazon पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं Chimiya, JioMart, Talk Pro और MaskMan Toys पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के हवाले से पीटीआई ने बताया कि Meesho, Meta, Chimiya, JioMart और Talk Pro जुर्माना चुका चुके हैं, जबकि बाकी प्लेटफॉर्म से भुगतान का इंतजार है।
नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ
भारतीय नियमों के अनुसार, वॉकी-टॉकी केवल तभी लाइसेंस से मुक्त होते हैं जब वे 446.0–446.2 MHz फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करें। इस दायरे से बाहर काम करने वाले उपकरणों के लिए इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) जरूरी है। CCPA की जांच में पाया गया कि कई प्लेटफॉर्म ऐसे उपकरण बेच रहे थे जो इन मानकों पर खरे नहीं उतरते। Flipkart पर हजारों यूनिट्स में फ्रीक्वेंसी की जानकारी अधूरी या गलत थी, जबकि Amazon पर रिव्यू के दौरान ही 2,600 यूनिट्स की बिक्री हुई।
भ्रामक दावे और ‘इंटरमीडियरी’ बचाव खारिज
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ विक्रेताओं ने भ्रामक विज्ञापन किए। Talk Pro ने अपने प्रोडक्ट को ‘100% लीगल’ और ‘लाइसेंस-फ्री’ बताया, जबकि Chimiya बिना वैधानिक मंजूरी के इपोर्टेड वॉकी-टॉकी बेच रहा था।
कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने खुद को केवल ‘इंटरमीडियरी’ बताते हुए जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की, लेकिन CCPA ने इस दलील को खारिज कर दिया। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि जो प्लेटफॉर्म ऐसे नियंत्रित उत्पादों की लिस्टिंग, प्रमोशन और बिक्री में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, उन्हें निष्क्रिय मध्यस्थ नहीं माना जा सकता।
नए दिशा-निर्देश और राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता
अब CCPA ने वॉकी-टॉकी और अन्य रेडियो उपकरणों की ऑनलाइन बिक्री के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दूरसंचार विभाग और गृह मंत्रालय से परामर्श के बाद बने इन नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को फ्रीक्वेंसी अनुपालन और मंजूरी की जांच करनी होगी, उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी देनी होगी और ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा।
CCPA ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है, चेतावनी दी है कि बिना अनुमति रेडियो डिवाइस कानून प्रवर्तन एजेंसियों, आपदा प्रबंधन और आपात सेवाओं के संचार में बाधा डाल सकते हैं। पीटीआई के अनुसार, IndiaMart और TradeIndia सहित पांच अन्य प्लेटफॉर्म की जांच अभी जारी है।