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ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन हुआ फेल? जानें दुनिया के लिए इसके क्या हैं मायने?

सोशल मीडिया कंपनियां प्रभावी तरीके से नियम लागू नहीं करेंगी, तो ऐसे प्रतिबंधों का असर सीमित रह सकता है। हालांकि, इस कानून ने दुनिया भर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और AI से बढ़ते डिजिटल जोखिमों पर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

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social media ban

ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों को सोशल मीडिया के नुकसान से बचाने के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया था। यह दुनिया का पहला ऐसा कानून माना गया था, लेकिन अब सामने आई एक नई रिपोर्ट ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिबंध लागू होने के कई महीने बाद भी अधिकांश बच्चे पहले की तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेट सुरक्षा एजेंसी eSafety की नई स्टडी के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के 10 में से 8 से अधिक बच्चे अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि 10 से 15 वर्ष की उम्र के अधिकांश बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधि मार्च तक लगभग वैसी ही रही, जैसी प्रतिबंध लागू होने से पहले थी।

स्टडी के अनुसार, प्रतिबंध लागू होने से पहले करीब 86% बच्चे कम से कम एक उम्र-सीमित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। तीन महीने बाद भी यह आंकड़ा 81% से अधिक बना रहा। वहीं, करीब 58% किशोर रोजाना सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि प्रतिबंध से पहले यह आंकड़ा लगभग 60% था।

आखिर क्यों नहीं रुका बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल?

रिपोर्ट में सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया कंपनियों की कमजोर एज वेरिफिकेशन व्यवस्था को बताया गया है। कई बच्चों ने कहा कि प्लेटफॉर्म ने उनकी उम्र की जांच ही नहीं की। कुछ मामलों में बच्चों ने अपनी प्रोफाइल में उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक दर्ज कर दी, जबकि कुछ मामलों में उम्र जांचने वाली प्रणाली ने उन्हें गलती से वयस्क मान लिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक की अच्छी समझ रखने वाले बच्चे VPN, फर्जी जन्मतिथि और अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर आसानी से प्रतिबंध को दरकिनार कर रहे हैं। कई बच्चे ऐसे प्लेटफॉर्म पर भी चले गए, जो इस कानून के दायरे में नहीं आते।

क्या था ऑस्ट्रेलिया का सोशल मीडिया बैन?

दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर प्रतिबंध लागू किया था। सरकार का कहना था कि साइबर बुलिंग, यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और आत्महत्या जैसे कंटेंट बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं।

इस कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को नाबालिगों की पहचान कर उनके अकाउंट ब्लॉक करने के लिए उचित कदम उठाने होंगे। नियमों का पालन नहीं करने पर बड़ी कंपनियों पर 3.3 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सरकार का क्या कहना है?

ताजा रिपोर्ट आने के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार अपने फैसले का बचाव कर रही है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य 100 प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा शुरू करना था। सरकार के अनुसार, लाखों बच्चों के अकाउंट पहले ही बंद किए जा चुके हैं और यह कानून अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा है।

बच्चों के लिए सोशल मीडिया कितना खतरनाक?

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पहले से ही बच्चों को गलत जानकारी, नफरत फैलाने वाले कंटेंट और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं के संपर्क में लाता रहा है। अब जनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल ने जोखिम और बढ़ा दिए हैं।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) ने भी चेतावनी दी है कि AI हिंसक और आपत्तिजनक सामग्री को तेजी से फैलाने में सक्षम है। वहीं, UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे AI से बनने वाले डीपफेक और ऑनलाइन यौन शोषण जैसी गतिविधियों को लेकर भी चिंतित हैं।

दूसरे देश भी अपना रहे हैं ऐसा मॉडल

ऑस्ट्रेलिया के इस कानून के बाद कई अन्य देशों ने भी इसी तरह के नियमों पर काम शुरू कर दिया है। ब्रिटेन 2027 से TikTok, Instagram और Snapchat जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के लिए प्रतिबंध लागू करने की तैयारी कर रहा है।

डेनमार्क 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लाने की योजना बना चुका है। मलेशिया ने भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगाने की घोषणा की है। ग्रीस 2027 से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस सीमित करने की योजना पर काम कर रहा है।

दुनिया के लिए क्या हैं इसके मायने?

ऑस्ट्रेलिया का अनुभव बताता है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। यदि उम्र की सही पहचान करने वाली तकनीक मजबूत नहीं होगी और सोशल मीडिया कंपनियां प्रभावी तरीके से नियम लागू नहीं करेंगी, तो ऐसे प्रतिबंधों का असर सीमित रह सकता है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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