आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक टेक्नोलॉजी के बढ़ने दुरुपयोग पर सरकार सख्त नजर आ रही है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया कंपनियों को डीपफेक मुद्दे पर सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां यदि डीपफेक कंटेंट को हटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाती हैं तो उन्हें आईटी अधिनियम के तहत जो सुरक्षा मिल रही है, उसे हटा दिया जाएगा।
DeepFake पर सरकार ने दिखाई सख्ती
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि सरकार जल्द ही डीपफेक मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से चर्चा करेगी और अगर प्लेटफार्म्स ने इस संबंध में पर्याप्त कदम नहीं उठाए तो उन्हें आईटी अधिनियम के ‘सेफ हार्बर’ प्रतिरक्षा खंड के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में डीपफेक मुद्दे पर टेक कंपनियों को नोटिस जारी किया था और प्लेटफार्मों ने जवाब भी दिया है। उन्होंने कहा कि लेकिन कंपनियों को ऐसी कंटेंट पर कार्रवाई करने में अधिक आक्रामक होना होगा।
वैष्णव ने कहा कि वे कदम उठा रहे हैं...लेकिन हमें लगता है कि कई और कदम उठाने होंगे। और हम बहुत जल्द ...शायद अगले 3-4 दिनों में सभी प्लेटफार्म्स की एक बैठक करने जा रहे हैं। हम उन्हें इस पर विचार-मंथन के लिए बुलाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि प्लेटफार्म डीपफेक को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास करें और अपने सिस्टम को ठीक करें।
ये है पूरा मामला
हाल ही में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद से डीपफेक और इसके गलत इस्तेमाल को लेकर वहस तेज हो गई है। बता दें कि वीडियो में किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को डिजिटल रूप से बदलने को डीपफेक कहते हैं। मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने ये वीडियो किसी को भी आसानी से धोखा दे सकते हैं। अभिनेत्री का वीडियो वायरल होने के बाद अब हर तरफ डीपफेक की चर्चा होने लगी।
