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चीन ने किया हैरान, बना दी उड़ने वाली विंड टरबाइन, दो हफ्ते तक घर चलाने जितनी बनाई बिजली

चीन ने एक बार फिर से पूरी दुनिया को अपनी तकनीक से हैरान कर दिया है। चीन ने हवा में उड़ने वाली विंड टरबाइन बना दी जिसकी टेस्टिंग भी सफल रही। इसने 2 हफ्ते तक घर चलाने जितनी बिजली बनाई।

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चीन ने किया हैरान, बना दी उड़ने वाली विंड टरबाइन, दो हफ्ते तक घर चलाने जितनी बनाई बिजली/Photo-Global Times

चीन ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के पहले मेगावॉट-क्लास उड़ने वाले विंड टरबाइन का सफल परीक्षण किया है। यह अनोखी तकनीक हवा में उड़ने वाले एक विशाल एयरशिप की मदद से बिजली पैदा करती है। इस परियोजना को बीजिंग की कंपनी Beijing Linyi Yunchuan Energy Technology ने विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा उत्पादन के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है।

हवा में उड़कर बनाता है बिजली

S2000 नाम का यह Airborne Wind Energy System (AWES) हीलियम गैस से भरा एक विशाल एयरशिप है, जिसमें कुल 12 छोटे विंड टरबाइन लगाए गए हैं। यह सिस्टम जमीन से हजारों फीट ऊपर उड़कर ऊंचाई पर मौजूद तेज और स्थिर हवाओं का उपयोग करता है। हवा के दबाव से टरबाइन घूमते हैं और बिजली पैदा करते हैं। इसके बाद यह बिजली एक विशेष केबल के जरिए जमीन तक पहुंचाई जाती है, जहां इसे पावर ग्रिड से जोड़ा जा सकता है।

परीक्षण में मिला शानदार परिणाम

कंपनी ने इसका परीक्षण चीन के सिचुआन प्रांत में किया। इस दौरान S2000 को करीब 6,560 फीट यानी 2,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ाया गया। परीक्षण के दौरान इस सिस्टम ने 385 किलोवॉट/घंटा बिजली पैदा की। यह मात्रा एक सामान्य घर को लगभग दो हफ्तों तक बिजली देने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। आकार की बात करें तो यह एयरशिप करीब 60 मीटर लंबा और 40 मीटर ऊंचा व चौड़ा है। इसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 3 मेगावॉट बताई गई है।

दूरदराज इलाकों में हो सकता है बड़ा उपयोग

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में हो सकता है जहां पारंपरिक बिजली पहुंचाना मुश्किल है। सीमा चौकियों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरस्थ गांवों में यह एक स्थिर ऊर्जा स्रोत बन सकता है। इसके अलावा इसे जमीन पर लगे विंड फार्म के साथ जोड़कर “थ्री-डायमेंशनल एनर्जी सप्लाई सिस्टम” के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सुरक्षा और रखरखाव बनी चुनौती

हालांकि इस तकनीक के सामने कई चुनौतियां भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2,000 मीटर लंबी केबल विमानन सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। इसके अलावा किसी भी खराबी या मरम्मत के लिए पूरे एयरशिप को जमीन पर लाना पड़ेगा, जिससे रखरखाव महंगा और जटिल हो सकता है।

ऊंचाई पर ज्यादा मिलती है पवन ऊर्जा

वैज्ञानिकों के अनुसार ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा की गति और ऊर्जा घनत्व भी बढ़ता है। यही वजह है कि उड़ने वाले विंड टरबाइन जमीन पर लगे टरबाइनों की तुलना में अधिक बिजली पैदा कर सकते हैं। यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो यह उन देशों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है जहां जमीन या समुद्री क्षेत्र की कमी के कारण बड़े विंड फार्म बनाना मुश्किल है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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